कैंसररोधी बुडविज आहार के अत्यंत महत्वपूर्ण बिन्दु

ये सब इस आहार विहार का महत्वपूर्ण हिस्सा है-

1. डाॅ. योहना कीमोथेरेपी, रेडियोथेरेपी, वनस्पति घी, ट्रांस फेट, मक्खन, घी, चीनी, मिश्री, गुड़, रिफाइन्ड तेल, सोयाबीन व सोयाबीन से निर्मित दूध व टाॅफू आदि, प्रिजर्वेटिव, कीटनाशक, रसायन, सिथेंटिक कपड़ों, मच्छर मारने के स्प्रे, बाजार में उपलब्ध खुले व पेकेट बंद खाद्य पदार्थ, अंडा, मांस, मछली, मुर्गा आदि से पूर्ण परहेज करने की सलाह देती थी।
2. वे कैंसर रोगी को सनस्क्रीन लोशन, धूप के चश्में आदि का प्रयोग करने के लिए भी मना करती थी। रोज सूर्य के प्रकाश का सेवन अनिवार्य है। इससे विटामिन-डी भी प्राप्त होता है। रोजाना दस-दस मिनट के लिए दो बार कपड़े उतार कर धूप में लेटना आवश्यक है। पांच मिनट सीधा लेटे और करवट बदलकर पांच मिनट उल्टे लेट जायें ताकि शरीर के हर हिस्से को सूर्य के प्रकाश का लाभ मिले।
3. रोगी को रोजाना अलसी के तेल की मालिश की भी जानी चाहिए इससे शरीर में रक्त का प्रवाह बढ़ता है।
4. रोगी को हर तरह के प्रदूषण (जैसे मच्छर मारने के स्प्रे आदि) और इलेक्ट्रानिक उपकरणों (जैसे ब्त्ज् वाले टी. वी. आदि) से निकलने वाले विकिरण से जहां तक सम्भव हो बचना चाहिए।
5. रोगी को सिन्थेटिक कपड़ो की जगह ऊनी, लिनन और सूती कपड़े प्रयोग करना चाहिए।
6. गद्दे भी फोम और पोलिस्टर फारबर की जगह रुई से बने है।

7. अलसी को जब आवश्यकता हो तभी पीसें। पीसकर रखने से ये खराब हो जाती है।
8. अलसी का तेल को तापमान 42 डिग्री सेल्सियस पर यह खराब हो जाता है।इसलिए प्रकाश व आॅक्सीजन से बचायें। आप इसे गहरे रंग के पात्र में भरकर डीप फ्रीज में रखें।
9. दिन में कम से कम तीन बार हरी या हर्बल चाय लें।
10. प्राणायाम, ध्यान व जितना संभव हो हल्का फुल्का व्यायाम या योगा करना है।
11. घर का वातावरण तनाव मुक्त, खुशनुमा, प्रेममय, आध्यात्मिक व सकारात्मक रहना चाहिये। आप मधुर संगीतें सुनें, खूब हंसें, खेलें कूदें। क्रोध न करें।
12. सप्ताह में दो-तीन बार वाष्प-स्नान या सोना-बाध लेना चाहिए।
13. पानी स्वच्छ व फिल्टर किया हुआ पियें।
14. अपने दांतो की पूरी देखभाल रखना है। दांतो को इंफेक्शन से बचाना चाहिए।
इस उपचार से धीरे-धीरे लाभ मिलता है और यदि उपचार ठीक प्रकार से लिया जाये तो सामान्यतः एक वर्ष या कम समय में कैंसर पूर्णरूप से ठीक हो जाता है। रोग ठीक होने के पश्चात् भी इस उपचार को 2-3 वर्ष या आजीवन लेते रहना चाहिये।
सबसे महतवपूर्ण बात यह है कि इस उपचार को जैसा ऊपर विस्तार से बताया गया है वैसे ही लेना है अन्यथा फायदा नहीं होता है या धीरे-धीरे होता है। अधिक जानकारी हेतु अंतरजाल पर हमारे इस पृष्ठ ीजजचरूध्ध् सिंगपदकपंण्इसवहेचवजण्बवउ पर चटका मारें। अधिक जानकारी के लिए डाॅ. ओ पी वर्मा कोटा से सम्पर्क कर सकते है। उनका मोबाईल नं. 9460816360 है।

Related Posts:

आहार चिकित्सा द्वारा कैंसर का इलाज : बुडविज का आहार-विहार

रिफाइंड तेल से कैंसर हो सकता है?

क्या पोषक आहार के होते हुए पुरक आहार की जरूरत है ?

एम आर लाला की कैंसर विजय कहानी

असाध्य रोगों से लड़ने वालों की सच्ची प्रेरक कहानियाँ: हंसते-हंसते पत्नी के ब्रेन-ट्यूमर का सामना किया

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s