प्राण ऊर्जा बढ़ाने प्राण ऊर्जा संवर्धन तकनीक (PET) का अभ्यास करें

प्राण ऊर्जा हमारा आदि कारण है । प्राण की बदौलत यह जीवन मिला हुआ है । प्राण ऊर्जा के प्रति समझ न होने से हम उसका उपभागे अपने पक्ष में नहीं कर पाते हैं । Pranic energizing techniqueयह अरूचि अज्ञान है । जब हम इसका उपभोग अपने पक्ष में नहीं करते हैं तो यह ऊर्जा हमे नचाती है व दुःखी करती है। इसका ज्ञान होने से ही रूचि होती है । जब तक इसका महत्व नहीं जानते हैं तब तक उसका उपभोग अपने पक्ष में नहीं कर पाते हैं ।
एस. व्यासा, बैंगलोर द्वारा प्राण संवर्धन हेतु एक बढ़िया तकनीक विकसित की है जिसे पेट कहते हैं । हमारे स्थूल शरीर के निर्माण के पीछे प्राण शरीर उत्तरदायी है । प्राण के अवयवस्थित, विकृत या बाधित होने से सारे रोग होते हैं । प्राण ऊर्जा को जगा कर, लयबद्ध कर स्थूल शरीर में आए रोग को ठीक कर सकते हैं । इसीलिए प्राण ऊर्जा सबसे महत्वपूर्ण है ।
इसे जगाने के आठ चरण निम्न है ।
1. प्रार्थना – प्राणस्येदं वशे सर्व यत् प्रतिष्ठतम् ।
मातेव पुत्रान् रक्षस्व श्रीश्च प्रज्ञां च विदेहि न इति ।।
तीनों लोगों में जो कुछ भी अस्तित्व में है, सब प्राण के नियंत्रण में है । जैसे माता अपेन बच्चों की रक्षा करती है, वैसे ही हे प्राण, हमारी रक्षा करो । हमें श्री-सम्पति दो, हमें प्रज्ञा दो ।

2. शरीर को शिथिल करना – शरीर के समस्त अंगो को पूरी तरह ढीला छोड़ना । तनाव का कम होना।
3. श्वांस के प्रति जागना व उसे संतुलित करना – नाड़ी शुद्धि प्राणायाम कर समश्वांस होना ।
4. संवेदनशीलता एवं पहचानना – स्नायु सचंरण के प्रति जागना, चिन, चिन्मय, आदि एवं नमस्कार मुद्रा के प्रति सचेत होना व स्नायविक परिसंचरण को महसुस करना । श्वसन, रक्त प्रवाह, हृदय का धड़कना, स्नायु, संचरण, प्राण-ऊर्जा में भेद अनुभव करना । (30 सैकण्ड) अन्तर्जगत से सम्पर्क होता है ।
5. प्राण को घुमाना एवं बढ़ाना – प्राण को स्केन कर शरीर के सभी अंगों में उसको अनुभव करना । इससे प्रतिरोध क्षमता बढ़ती है ।
6. अस्तित्व से जुड़ना – प्राण को फैला कर अस्तित्व से जुड़ना, विस्तार अनुभव करना । ब्रह्माण्ड से परिचय बढ़ता है ।
7. संकल्प – अपनी चाह को 9 बार दोहराना । इससे संकल्प खक्ति बढ़ती है । दिव्यता जगती है ।
8. शुभाकांक्षा करना – सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः ।
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चित् दुःख भाग् भवेत् ।।
सभी सुखी हो, सभी रोग रहित हो, सभी परम तत्व प्राप्त करें, कोई भी दुखी न हो ।

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s