हमारी जीवन शैली रोगों की जनक हैं –स्वास्थ्य-सेतु

आज हमारी जीवन शैली बाजारवाद, उपभोक्तावाद एवम् जल्दबाजी से विक्रत हो गई है । हमारा भोजन स्वाद के अधीन हो गया, पोषकता को भूल गये । श्वास की लय टूट गयी है ,उतावल ने उसे असहज बना दिया । हमको व्यस्तता ने स्वंय के प्रति अंधा बना दिया है। हम आदतों के पुतले हो गये । अतः जीवन शैली रोगों की जनक है ।प्रतिक्रियात्मक शैली ने सहजता हमसे छीन ली है । हमारी सोच एवं आपाधापी हमें स्वस्थ नहीं रहने देती है ।सोच सम्यक् नही होने से जीवन भी सम्यक नहीं रहता है । सोच विरोधाभाषी होने से शरीर के स्त्राव भी संतुलित नहीं रहते है । शरीर की प्रज्ञा भी सही दिशा में कार्य नहीं कर पाती है । जीवन में खुशी की लहर रह नहीं पाती है । शरीर में खिंचाव बढते है जिससे रोग बढते है।  I am resposible for my illness
जो अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रह कर निरन्तर निरोगी रहना चाहते है, अपने परिवार एवं इष्ट मित्रांे को आर्दश रूप में स्वस्थ रखना चाहते है। यह ग्रुप उनके लिये है। समग्र चिकित्सा में विश्वास करते है। वैकल्पिक चिकित्सा भी लेने को तत्पर है। चिकित्सा के बाजारीकरण को समझते है। दवा माफिया के प्रपंच से अवगत है। यह उन मित्रो के लिये जो नई संभावना खोजना चाहते है।

4 विचार “हमारी जीवन शैली रोगों की जनक हैं –स्वास्थ्य-सेतु&rdquo पर;

  1. आपने बिलकुल सही बात लिखी है but हमें ज़माने के साथ बदलते रहना चाहिए पहले के लोग धोती पहनते थे आश्रम में रहते थे और दिन भर योग करते थे अगर आज के दिनों में हम वो सब करेंगे तोह ना ही समाज अच्छा कहेगा और ना ही किसी का शादी होगा और जीना मुश्किल हो जायेगा !

    फ़ास्ट फूड्स खाना गलत बात नहीं है, ज़िन्दगी जीने का सबका अलग अलग फैशन है !

    एक बात आपको जानना चाहिए की किसी महान आदमी ने कहा था की 100 दिन कुत्ते की ज़िन्दगी जीने से अच्छा है 1 दिन शेर की ज़िन्दगी जियो !

    बाबा रामदेव में जमींन पे सोते है, गो मूत्र पीते है और ठंड के दिनों में भी 4 बजे उठ के योग करते है, क्या ये सब हेल्थ के लिए करे या जितनी दिन जी रहे है उतना दिन अच्छे से जीए !

    मानव पहले से जाएदा समझदार हो चूका है लेंकिन पुराने लोगो को लगता है की सर्फ वही सच्च बोल रहे है और वही सही है !

    मेरे बातो का गलत मतलब नहीं निकालिये गा ये मेरे अपने विचार है, जैसे की आपका अपना विचार है !

    Regards

    http://www.kaisekamayetips.com

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