प्राणिक हीलिंग क्या है व इससे उपचार कैसे होता है ?(अंतिम भाग)

इस विधि द्वारा जब अपना व मित्रों पर उपचार किया तो इसका ज्ञान हुआ। यह बहुत कारगार व श्रेष्ठ विद्या है जो कई रहस्यों को खोलती है । ऋषि-मुनि कैसे आशिर्वाद देते थे जो पूरे होते थे । गंावों में मन्त्रित पानी देना, नीम की पतियां व झाडु से झाड़ना, झाड़ फुंक का आधार प्राणिक हीलिंग में मिला । sarve bhavantuइसमे हमारे आभामण्डल की सफाई व इसे ऊर्जित कर उपचार किया जाता है। प्राण ऊर्जा ही स्थूल शरीर बनाती है। अतः प्राण् ऊर्जा को व्यवस्थत करनें से स्थूल शरीर ठीक होता है। शरीर अपनी चिकित्सा करने में दक्ष है। प्राणऊर्जा शरीर के रसायन की बदलनें में समर्थ है।यह इसे बढ़ाता है।प्राण शरीर से आई नकारात्मकता व कालीऊर्जा को सफाई कर कम किया जाता है व अर्जित करनें के क्रम में स्वस्थ्य ऊर्जा दी जाती है। प्राण शरीर की दरारें भर जाती है व स्थ्वास्थ्य किरणें संग्रहित की जाती है।
यह सामान्य रोगों में तो बहुत कारगर है लेकिन जटिल रोगों में रोगी के जीवन की गुणवता जरूर बढ़ाता है । रोगी अन्य दवाईयां भी लेता है । स्थूल शरीर में प्रकट हुआ रोग स्थूल दवाओं से भी ठीक होता है। अतः अन्य दवाऐं लेतें रहना है। यह रोगी के ठीक होने की क्षमता को तीन गुणा बढ़ाता है । सफलता के लिए उन्नत प्राणिक हिलर चाहिए । व्यक्ति स्वयं भी सीख कर अपना उपचार कर सकता है । मुझे छोटे-छोटे प्रयोगों द्वारा इसकी यथार्थता का परिचय मिला । मैं इसकी सहायता से अपनों की सामान्य चिकित्सा भी करने लगा हूं । अभी मैं इसका विद्यार्थी हूं । इसलिए इस परअधिक कहना कठिन है । आप अपने विचार प्रस्तुत कर सकते हैं ।

 

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