कब तक गलतियों व क्षमा का क्रम चलेगा ?

प्रिय आत्मन,

 

kshama-yachna

मुझसे गलतियां हुई है। मेरी चुकें बढी है, व्यवहार में रूखा हूं, आपके प्रति कुछ अप्रिय कहा है एवं किया है। इसका खेद है। औपचारिक क्षमा नहीं, दिल पर हाथ रख कर क्षमा चाहता हूं।

अपनें अन्तर में झांकनें पर भूले स्पष्ट दिखती है, जिसकी सजा भी आप दे सकतें हो।

एक प्रश्न मन में आता है कब तक यह क्रम गलतिया करना व क्षमा मांगता रहूगा?

क्षमा प्रार्थी

जयन्ती-मीना जैन

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3 विचार “कब तक गलतियों व क्षमा का क्रम चलेगा ?&rdquo पर;

  1. आदमी तो गलतियों का पुतला है ….
    जब तक हम सच्चे अंतर्मन से अपने आप को नहीं झांक पाएंगे गलती होती रहती है और क्षमा मांगने का दस्तूर भी चलता रहेगा … . खैर सच्चे मन से क्षमा मांगकर फिर उसे न दुहराई न जाय तो यह भी बहुत अच्छी बात है ..

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