असाध्य रोगों से लड़ने वालों की सच्ची प्रेरक कहानियाँ: हंसते-हंसते पत्नी के ब्रेन-ट्यूमर का सामना किया

मेरा दुःख और कष्ट मेरी धर्मपत्नी की असाध्य बीमारी ब्रेन-ट्यूमर था; अन्यथा मैंने अपनी जानकारी मंे कभी भी दुःख और कष्ट महसूस नहीं किया।
मेरे इस दुःख और कष्ट का निराकरण सिर्फ प्रेम का ही सहारा था जो मैंने जीवन में शुरु से ही अपनाया है। महान् लेखक स्वेट मार्डेंन ने कहा है कि जीना ही है तो हंसते-हंसते जिओं।मैंने अक्षरसः इसका पालन करते हुए अपनी पत्नी का इलाज कराया। मैंे हमेशा जागरुक रहा कि मुझे-
1. चिन्ता नहीं करनी है, क्योंकि यह मन की सबसे हानिकारक अवस्था होती है।
2. हमेशा नोर्मल रहना है, क्योंकि यदि मानसिक शांति नहीं है तो मेरी कार्य क्षमता पर उसका बुरा असर पड़ेगा।
3. असाध्य बीमारी होने से पता था कि निकट भविष्य मंे क्या होना है इसलिये मैं हमेशा अपने परिवार के सदस्यों के साथ, रिश्तेदारों के साथ दिखावटी हंसी नहीं बल्कि दिल से हंसता रहा हंसाता रहा और हमेशा यहीं कहता रहा कि विपत्तियां तो आती रहती है। सुख-दुःख का तो जोड़ा है। इसलिये यह दुःख की रात भी बीत जाएगी। मेरे इस हौसले से मेरे परिवार के सदस्य भी चिंता रहित रहे और हर तरह से मेरा साथ देते रहे।
मेरी पत्नी कांता सितम्बर 1996 से जून 2005 तक इस असाध्य बीमारी से ग्रसित रही। 1996, 2000,2002,2004 मंे क्रमशः 4 सर्जरी हुई। कल्पना कीजिये मैं किन हालतों से गुजरा होऊँगा। आर्थिंक भार के अलावा मानसिक ओैर सरकारी नौकरी में एक महत्वपूर्ण पद पर रहते हुए समय निकालना बहुत कठिन था।
मेरी धर्म पत्नी की बीमारी के दौरान् 9वर्ष तक उसकी सेवा शुश्रूषा मंे कहीं कोई कमी नहीं आवें यह मेरा अथक प्रयास रहा। आखिर के चार महिने मार्च 2005 से जून 2005 मंे तो मैं पूरी तरह सेवा सुश्रूषा मंे जुटा रहा और मैंने मन को हमेशा दृढ़ रखा। मन की दृढ़ता पर ही बहुत कुछ निर्भर रहता है। मैंने कभी चिड़़िचड़ा पन और अप्रसन्नता नहीं दिखायी। मेरा एक ही आदर्श था-कांता की सेवा सुश्रूषा में कोई कमी न रहें। मैंने इस आदर्श को कभी एक पल के लिये भी नहीं खोया।
मैंने युवाकाल से हंसते-मुस्कराते हुये सर्वोंत्तम जीवन जीने का संकल्प पाल रखा है। मुझे किसी चमत्कार और जादू पर विश्वास नहीं है। सिर्फ दृढ़ इच्छाशक्ति, संकल्प, धेैर्य, आशा और ईश्वर तथा स्वयं पर विश्वास है और मैंने यह अपनी आदत बना ली है कि प्रत्येक दशा में प्रसन्नता नहीं खोनी है। कभी भी घटियापन पर नहीं उतरना है। कभी कूढ़ो मत, कभी रोओ मत। मैंने अपनी रुचियां हमेशा ऊँची रखी है। हमेशा उत्तम वस्तु ही पाना चाहता हूँ और पायी है।
मैंने कभी संकीर्ण मनोवृति नहीं पाली। संकीर्ण मनोवृति वातावरण को मनहूस और दमघोंटू बनाती है और खुशियों को छीनती है। इस दुःख के दौरान् भी मैंने पूरी सावधानी बरती।
मैंने बहुत ही पहले अपने अंदर से आन्नद प्राप्त करना सीखा है। इस संकट और दुःख की घड़ी के समय मैंने और परिवार के सदस्यों ने मनोरंजन से मुँह नहीं मोड़ा। मनोरंजन से शरीर और मस्तिष्क हल्का-फुल्का हो जाता है। सत्य ही कहाँ है जिन्दगी जिन्दा दिली का नाम है। विकट परिस्थितियों के बावजूद सबके साथ हंसता-मुस्कराता रहा। हमेशा उजले पक्ष को देखने की ही आदत है। अँधरे पक्ष को देखने की बुरी आदत पड़ी ही नहीं।
कांता लक्ष्मी थी उसमें असीम प्रेम और प्रतिभा थी। औपचारिक शिक्षा न होने के बावजूद वह अपनी चतुराई से दुर्भाग्य पूर्ण परिस्थितियों को भी आन्नद में बदल देती थी और इसलिये यह स्वभाविक था कि उसके प्रति हम सभी का समपर्ण रहा।
मैंने उसकी सेवा करते कभी अपने आपको अशक्त और वृद्ध नहीं माना। मुझे बुढ़ापे का एहसास ही नहीं होता। मैं क्या हूँ, अपने विचारों का ही तो परिणाम। मुझे अपने जीवन से प्यार है इसलिये मैं उसे दूषित विचारों से भ्रष्ट नहीं होने देता। संघर्ष ही तो जीवन है। मैंने तनावों पर नियन्त्रण रखा।
यही आमोद-प्रमोद से भरी बातें और यादें मुझे आनंद देती हैं और मैं ह्नदय से अपनी पत्नी का कृतज्ञ हूँ। उसके साथ मेरी जवानी में शादी एक ऐसी बात है जो हमेशा सुखदायी रही। तो क्या मैं उसकी बीमारी से दूर भागता? नहीं कभी नहीं।
मैंने सीखा है और मैं अपने बच्चों से भी कहता हूँ कि-
1.बुरे समय मंे हिम्मत न हारें व्यवहार मंे सहज रहें।
2.कृपया बहानों की शरण न लें।
3.अपने को प्रेम करो ताकि दूसरों से घृणा न कर सको।
4.उदार और सहयोग करने से परिवार मंे महत्व मिलता है।
5.अपने वायदों को पूरा करो।

हंसते-हंसते उन्हें अन्तिम विदाई दी एवं स्वीकारा यही सच है।

-छगनलाल जैन सेवानिवृत इन्जिनियर
,115 शान्तिनिकेतन, अशोक नगर
उदयपुर

4 विचार “असाध्य रोगों से लड़ने वालों की सच्ची प्रेरक कहानियाँ: हंसते-हंसते पत्नी के ब्रेन-ट्यूमर का सामना किया&rdquo पर;

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s