क्या मुझे प्रकृति चक्र को तोड़ने मंे शरीक होना चाहिए ?

प्रकृति में सुन्दर व्यवस्था है । मनुष्य को छोड़ सर्वत्र उसका पालन स्वतः होता है । अपना अपना कार्य स्वतः करते हैं जिससे यह चक्र बना हुआ है । मनुष्य भी पिछले 50 वर्षों से अपनी भूमिका भूल गया है।प्रकृति चक्र
पदार्थ अवस्था, प्राण अवस्था, जीव अवस्था एवं ज्ञान अवस्था परस्पर पूरक है । अन्योन्याश्रित ही नहीं बल्कि एक दूसरे को संवर्धित करते है । चारों साथ रहते हैं, अपनी-अपनी जगह स्वतन्त्र भी है एवं निर्भर भी है । सभी इकाईयां अपनी मौज में दूसरे के साथ रहती है । सिर्फ मनुष्य ने अपनी भूमिका भय एवं प्रलोभन के कारण बदल दी है । इससे पूरा अस्तित्व खतरे में है । इसलिए यह हमारी जिम्मेदारी है कि अपनी भूमिका चक्र अनुसार रखें। अपने ज्ञान का दुरूपयोग चक्र तोड़ने में न करंे । इसी से पर्यावरण संतुलन बिगड़ रहा है । अपना ध्यान इधर से हटाकर संतुलन पर करना है । फिर कोई बाधा नहीं है । हम समर्थ है समाधान करने मे समस्या भी असंभव नहीं है ।
मोबाईल निर्माण हेतु कुछ धातु व प्लास्टिक प्रयोग हुआ है । प्लास्टिक पेट्रोलियम के कुछ पदार्थों से बना है । सब कुछ पृथ्वी से ही लिया है । इस अर्थ में मिट्टी से मोबाईल बना है । मिट्टी से मोबाईल बनाने वाला दिमाग सम्बन्धो व पर्यावरण संतुलन रखने के उपाय क्यांे नहीं खोज सकता है ?
चूंकि हमारा ध्यान उधर गया नहीं है । इधर गया तो बहुत सृजनशीलता दिखाई है । हम सुविधाआंे के विस्तार में लगे रहे । अब सम्बन्ध की कला भी सीखे व इस क्षैत्र मंे बुद्धि सृजन लगाएं ।
मैं इस सहज व्यवस्था में विघ्न पैदा करूं ? क्या मुझे संतुलन बनाए रखने में अपनी भूमिका ईमानदारी से नहीं निभानी चाहिए ।

Related Posts:

पूर्वाग्रह व निष्पक्ष तार्किकता को दर्शाती फिल्म ‘एक रूका हुआ फैसला’

जीवन विद्या के अनुसार मूल्य एवं कीमत में क्या फर्क है ?

जीवन विद्या शिविर :स्वयं को जांचने व मापने की कला सीखी

क्या कार्य पूरा करने हेतु ‘‘छोटा रास्ता’’ चुनना उचित है ?

2 विचार “क्या मुझे प्रकृति चक्र को तोड़ने मंे शरीक होना चाहिए ?&rdquo पर;

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s