श्रेष्ठ लोगों से नेटवर्किंग कैसे करें व उनसे कैसे जु ड़ें ?

श्रेष्ठ लोग आपस में परस्पर नहीं जुड़ते हैं । वे आपस में अधिक व्यवहार नहीं बढ़ाते है । दूसरी तरफ स्वार्थी लोग परस्पर जल्दी मित्र हो जाते हैं । साथ ही श्रेष्ठ लोगों को अपने चुंगल में लेकर उनका दुरूपयोग कर लेते हैं । ऐसे मे संस्था व संगठन के तन्त्र/प्रक्रिया में फिर उनका शोषण होता है एवं उनको अपने अनुरूप ढाल लेते हैं। Networking with good people
सज्जन व्यक्तियों के बीच मेल मिलाप कम होता है । भले लोगों को आपस में जोड़ें । व्यक्तिगत तौर पर बहुत से व्यक्ति श्रेष्ठ होते हैं । वे अच्छे लोगों से सम्पर्क नहीं रखते हैं । उनमे परस्पर मैत्री कम ही होती है । इसलिए समान विचारों के मित्रों को खोजना व जुड़ना महत्वपूर्ण है । किसी जगह पर गिने-चुने व्यक्ति ही श्रेष्ठ नहीं होते हैं । अच्छे लोगों की संख्या खराब व्यक्तियों से अधिक है फिर भी राज दुर्जन लोग करते हैं क्योंकि ऐसे लोग नेटवर्किंग करते हैं । अतः भले लोगांे को परस्पर जोड़ने हेतू प्रयत्न करने चाहिए ।
चालाक लोगों की नेटवर्किंग बड़ी होती है । शराबी परस्पर एक मूलाकात मंे अच्छे मित्र हो जाते हैं । वे एक दूसरे की मदद करते हैं । दुर्जन व्यक्ति अपना ढोल बजा-बजा कर मित्रता स्थापित करते हैं । निज हित साधने के लिए ऐसे लोग शिघ्र जुड़ जाते हैं ।
अच्छे लोग सात्विक अहंकार मंे कैद होते हैं । वे अपनी निजता को ही सर्वश्रेष्ठ मानकर उसमें बन्द रहते हैं । उन्हे अपनी स्वतन्त्रता व स्वाभिमान का बड़ा घुमान होता है । वे अपने अच्छे स्वभाव को ही अपना रक्षा कवच मान कर अन्य सज्जनों को महत्व नही देते हैं । उन्हे परस्पर स्नेह बढ़ाते नहीं देखा जा सकता है । इसलिए वे परस्पर सम्पर्क नहीं रखते हैं ।
भले लोग अपने-2 द्वीप बने रहते हैं । वे परस्पर जल्दी मित्र नहीं बनते हैं । स्वयं को ही उचित मान कर अलग रहते हैं । अपने जैसे श्रेष्ठ लोगों से जुड़ने लालायित नहीं रहते हैं । अपने मानसिक संदूक से बाहर आने की आवश्यकता ही नहीं समझते हैं । शेंष सब को अन्यथा मानकर चलते हैं । अपने में सीमित रहते हैं जिससे उनकी अच्छाई बढ़ती नहीं है व उनके श्रेष्ठ होन का लाभ अन्य व्यक्तियों को मिल नहीं पाता है । ये जुड़ने का उपाय नहीं खोजते हैं । अच्छाई का विस्तार करने से डरते हैं । संकोच इनमे बड़ा होता है । साझा मंच नहीं खोजते हैं । अच्छी आदतों व अच्छी सोच के ढांचे में बन्द हो जाते हैं । अपनी श्रेष्ठता को फैलाते नहीं है । उसे बढ़ाते नहीं है । यह उनकी भूल समाज के लिए घातक है ।

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