मातृत्व जिम्मेदारी नहीं सृजन है ,स्त्री की की अपनी तलाश है

मातृत्व आनन्ददायक है । लेकिन इससे  जिम्मेदारी बढ़ती  है । स्त्री सक्षम होती , प्रवीण होती है  इस भूमिका को निभाने में इसलिए चिन्ता की जरूरत नही है ।
Motherhood-Picassoमां बनना मात्र एक शारीरिक कृत्य से अधिक भावनात्मक कृत्य है । जैविक मां बनने मे 9 माह लगते हैं, लेकिन मातृत्व को निभाने में पूरा जीवन लगता है । जैविक मां बनने के बाद बड़ी चुनौतियां है । चुनौती का यह प्रारम्भ है ।
एक स्त्री की शादी की पूर्णता मां बन कर ही होती है । जीवन मंे सृजन मां बनने से प्रारम्भ होता है । मां का कृत्र्तव्य स्त्री को प्रतिपल सजग व सृजनशील बनाता है । स्त्रीत्व का बड़ा दर्जा मातृत्व है । वह स्वयं प्रकृति में अपनी भूमिका को पूरा करती है । इससे स्वयं के सारे अधुरेपन मिट जाते हैं । अपने शरीर के द्वारा नए शरीर को सफलता पूर्वक गढ़ना बड़ी जीत है । इसके माध्यम से स्त्री की तलाश पूरी होती है । उसके सारे अरमान साकार होते हैं ।  मां विजेता होती है । याद रखो मां मात्र  पुत्र  की नहीं होती, मातृत्व एक अवस्था है ।
तुम्हारी भूमिका बढ़ गई है । तुमसे सृष्टि अवतरित हुई है । पत्नी एवं बहु की भूमिका से बढ़ कर मां की भूमिका होती है । स्त्री को बेटी/बहन/पत्नी/बहू, से बड़ी भूमिका मां की होती है । मातृत्व स्त्री को सबसे बड़ा उपहार प्राप्त है । इसमे सामन्जस्य बेठाते हुए स्वयं को भी नहीं भूलना है । वैसे तुम स्वयं की कीमत पर दूसरों को अधिक महत्व देती रहती हो, क्या यह उचित है ? अपनी वृहतर भूमिका को सजगता से निभाओ, स्वयं तृप्त होओ व सबको भूमिकानुसार तृप्त रखो ।
पुत्र  की प्रथम शिक्षिका प्रथम रहे ! उसकी सृजनक्षमता, आत्म-सम्मान व सहजता को विकसित करंे । बच्चे को किसी रूप में विकृत न होने दे ।  पुत्र ही  उसका नहीं है । उसके आस-पास के परिजन, हवा, मिट्टी व संगी साथी भी उसका हैं । बेटे को स्वतन्त्र समझदार नागरिक बनाना । जातिवाद, पन्थवाद की परम्परा से बचाना है । लालन-पालन मां का विशेषाधिकार के साथ बड़ी जिम्मेदारी है । घ्यान रखें कि अपने पालने में हुई चुके व गलतियां उसे न भुगतनी पड़े ।

माँ ! मातृत्व को गौरवान्वित करो, उसकी सर्वोच्च सम्भावना तक पंहुचो !

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मातृत्व जिम्मेदारी नहीं सृजन है ,स्त्री की की अपनी तलाश है&rdquo पर एक विचार;

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