तनाव व चिन्ता घटाने हेतु भ्रामरी प्राणायाम करें

भ्रामरी प्राणायाम चिन्ता व तनाव को घटाता है । यह हमारे विचारों को शिथिल करता है । मादा भंवरे की तरह गुंजन मन को शान्त करती है । इसीलिए इसे भ्रामरी प्राणायाम कहते हैं । यह कभी भी किया जा सकता है । इसके कम्पन्न हमें मानसिक विश्राम पंहुचाते हैं । Bumblebee Pranayam
विधीः-
ध्यान लगाने वाले आसन में बैठ कर करें कमर, पीठ व गर्दन सीधी रखें । ध्वनि तरंग को मस्तिष्क में अनुभव करें व इसी पर चेतना को केन्द्रित करें । भ्रामरी प्राणायाम में नाक से श्वांस भर कर धीरे-धीरे गले से भ्रमर की गुंजन के साथ श्वांस छोड़ते हैं । गंुजन करते वक्त जीभ को तालु से लगायें । दांत बन्द व होठ खुले रखें । यह प्राणायाम पूरी तरह शरीर को शिथिल कर आराम के साथ किया जाता है । इसमे ध्वनि निकालते वक्त ‘न’ के उच्चारण पर जोर रखें । ओम उच्चारण में ‘म‘ पर जोर देते है तब होठ खुले रहते है । ’न’ पर जोर देने से होंठ स्वतः बन्द हो जाते हैं । दोनों में शब्दों के जोर को ध्यान में रखें । आवाज इतनी सी करे कि पड़ौसी को सुनाई दे । इसमे श्वांस लेने में 10 सैकण्ड व छोड़ने में 20 से 30 सैकण्ड तक का समय लगाएं । यह एक आवृति हुई । इसी तरह 5-10 मिनट तक भ्रामरी निरन्तर करें । इसे शान्त व शिथिल होकर करें । इसे करते वक्त शरीर को सहज रखें । पीठ, गर्दन व सिर सीधे रखें ताकि रीढ़ की हड्डी सीधी रहे । इसे करते वक्त गुंजार की ध्वनि को सिर व पूरे शरीर में फैलने दे । साथ ही इसकी प्रतिध्वनि सुने । शरीर में इसके फैलते कम्पनों को महसूस करें ।
लाभः-
शारीरिक लाभ
इसके करने से मस्तिष्क में मालिश हो जाती है । उच्च रक्तचाप कम होता है ।यह नाद के प्रति सजग करता है ।
मानसिक लाभ
चिन्ता व तनाव मिट जाते हैं । विचार करने की गति कम हो जाती है । एक दिन में हम 60,000 विचार करते हैं तो एक मिनट करीब 42 विचार करते है। गुंजन करने से विचारों की गति मंद पड़ जाती है । इसे सहज होकर करते हैं । इसे करने से आत्मविश्वास, एकाग्रता व समृति बढ़ते हैं । आध्यात्मिक लाभः
यह हमारे भीतर कोश को बढ़ाता है । यह हमे ध्यान की तरह आगे बढ़ाने में सहायक है । मन को लयबद्ध करता है व अन्तर यात्रा में सहायक है
सावधानी -कान में संक्रमण हो तो इसे न करें । इसे करते वक्त आसन स्थिर रखें । कन्धों को ढीला छोड़े व हिलाएं नहीं । यह प्राणायाम कभी भी किया जा सकता है । सोते वक्त लेटे लेटे भी कर सकते है । इसे करने से कभी कोई हानि नहीं होती है । जबरदस्ती गंुजार को न खींचे । जितना आराम से करेगें उतना ही अच्छा ।

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3 विचार “तनाव व चिन्ता घटाने हेतु भ्रामरी प्राणायाम करें&rdquo पर;

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