क्षमा मांगना एक यान्त्रिक कर्म नही बल्कि अपनी गलतियों का अहसास है

क्षमा मांगना एक यान्त्रिक कर्म नहीं है बल्कि अपनी गलतियों को महसूस कर उस पर पश्चाताप करना है । पश्चाताप में स्वयं को भाव होता है । ताकि हम अपनी आध्यात्मिक यात्रा आगे बढ़ा सकें । जैन दर्शन के अनुसार वास्तव में क्षमावाणी के पीछे अपनी कमियां, कमजोरी व मतलब के कारण दूसरों को हानि पंहुचाने की वृति को बदलना है । हम इस तरह की गलतियां बार-बार किन कारणों से करते आये हैं । उनको पहचान कर अपनी आदतों को बदलना है । यह एक तरह से स्वयं का परीक्षण करना है । अर्थात क्षमा मांगने से पूर्व अपने दोषों का ज्ञान होना आवश्यक है । kshama
मुझे गलती का ज्ञान नही है यानि मुझे उसका एहसास नही है तो फिर मैं किस बात की क्षमा मांगता हुं । मात्र शब्दों के सहारे सम्बन्ध बढ़ाना क्षमा मांगने का लक्ष्य नहीं है । अनजानी गलतियों सम्बन्ध माफी की बात बड़पन दर्शाने की चतुराई तो नहीं है ।

यान्त्रिक रूप से क्षमा मांगना सम्पर्क बढ़ाने का साधन है । कार्ड भेजना, एसएमएस करना व ई-मेल भेजना क्षमा मांगना नहीं है । बल्कि एक औपचारिकता पुरी करना है । जैन दर्शन सभी औपचारिकताओं को कर्मकाण्ड मानने से हेय मानता है ।

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3 विचार “क्षमा मांगना एक यान्त्रिक कर्म नही बल्कि अपनी गलतियों का अहसास है&rdquo पर;

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