क्या रक्षाबन्धन नारी को कमजोर मानता है जो भाई को राखी बांधे ?

जब स्त्री-पुरूष में बराबरी का जमाना है तो कौन किसकी रक्षा करे । नारी क्यों भाई से रक्षा की प्रार्थना करें ? क्या यह पुरूष प्रधान समाज का त्यौहार है जिसमे यह माना गया है कि स्त्री कमजोर है एवं उसकी रक्षा पुरूष को करनी चाहिए । यह त्यौहार जहां तक स्त्री को कमजोर मानता है वहां तक यह पुरातनपन्थी है । मुझे इसमे पुरूष को नारी से अधिक योग्य मानना ठीक नही लगता है । यह नारी की गरिमा को घटाता है । नारी को समान नहीं मानने वाला है । raksha bandhan

प्रतीकात्मक रक्षा-सूत्र परस्पर बांधे व परस्पर रक्षा का वचन दे वहां तक ठीक है । इसकी पौराणिकता, ऐतिहासिकता अपनी जगह उचित है । । इसका सांस्कृतिक व धार्मिक पहलू अपनी जगह ठीक है । शिष्य गुरू को बांधे, ब्राह्मण यजमान को बांधे, छोटे बड़ों को बांधे वहां तक ठीक है । लेकिन बहन भाई को बराबर मानने का मैं पक्षधर हूं । यह परस्पर प्रेम बढ़ाता है । एक दूसरे को निकट लाता है । भागती दुनिया में सम्बन्धों को किसी बहाने गहरा करे वहां तक ठीक है । लेकिन छोटा भाई-कमजोर भाई बड़ी व सक्षम बहन की रक्षा कैसे कर सकता है ।

त्यौहार यद्यपि त्यौहार हमारी भावनाओं को बढ़ाने व आपसी प्रेम को बढ़ाने हेतु होते हैं । त्यौहार हमे पूर्ण बनाते है । मनुष्य को जोड़ने के कारक होते हैं । अतः इनमे जबरन मीन मेख निकालना समझदारी नहीं है । जैसे तैसे भी परिवार में एकता बढे़ ऐसे सारे उपक्रम सार्थक है । अतः अपनी बुद्धि को ज्ञानी बताने इसमे टांग अड़ाना समझदारी नहीं है । स्वार्थी होते समाज में अपने कर्तव्यों को दिखाने वाले पर्व उपयोगी है ।
किसी भी तन्त्र या पर्व में नकारात्मकता देखना संभव है । लेकिन बुद्धिमता उसके सकारात्मक पहलू को देखने में है । हर चीज के दोनो पहलू होते हैं । हमारे पूर्वजों ने उनकी शुरूआत करते वक्त बहुत सोचा था । ये सैंकड़ो वर्षों की शोध एवं अनुभव से उपजे हैं । अतः इनका विरोध तर्कसंगत होकर भी वृहत रूप से उपयोगी नहीं है ।

पर्वाें पर कुछ प्रतीकात्मक औपचारिकता उसमे रंग भरने होती हैं । अतः उस पर अत्यधिक जोर न देकर उसके सार को समझना व जीवन में उतारना महत्वपूर्ण है । सूत्र बांधना, कौन बांधे, कब बांधे, किसे बांधे इन सबसे जरूरी है परस्पर सब बंधे रहे । एक दूसरे को आगे बढ़ाने में मदद करें । माता-पिता के बाद परिवार में भाई-बहन सबसे महत्वपूर्ण होते हैं । अतः उन्हे जोड़ने इस को बनाया गया है । अतः यह नारी को कमजोर मानने वाला नहीं उसके अपने पीहर से जोड़ने का त्यौहार है क्योंकि वह ससुराल में नया घर बसाती है । पूराने को न भूले इस हेतु मनाया जाता है । भाई को कर्तव्य की याद दिलाने हेतु मनाया जाता है । नारी को सम्मान देने को त्यौहार है । विशिष्ठ स्थान देने का त्यौहार है ।

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