गहन रिलैक्स करने वाले साइक्लिक मेडिटेशन का परिचय

एस व्यासा, बैंगलोर मे हुए अनुसंधान से यह स्पष्ट हुआ है कि आवर्तन ध्यान निद्रा एवं शवासन करने से भी अधिक विश्राम देता है । माण्डूक्य उपनिषद से इसकी प्रेरणा ली गयी । इसमे शरीर को क्रियाशील कर शिथिल किया जाता है । इसमे उद्दीपन व विश्राम साथ साथ चलते हैं ताकि साधक विचारांे के जाल में न फंस जाय व स्वयं में केन्द्रीत रहे । विश्राम करने की यह तकनीक शवासन की अपेक्षा अधिक कारगर है । व्यक्ति इसमे सो नही सकता, न ही विचारों में डुब सकता है । इसमे पांचो शरीर प्रभावित होते हैं । सक्रिय होने पर एकाग्रता बढ़ती व शिथलीकरण पर तनाव विसर्जित होते हैं । यह ध्यान करते समय अपने शरीर को झटका न दे, न ही क्रिया के बीच रूके । सभी क्रियाएं बहुत धीरे धीरे करें । अपनी गतिविधी के प्रति सजग रहे । पोश्चर की अपेक्षा आन्तरिक जागरण ज्यादा महत्वपूर्ण है । जीवन की कला, कुशलता व बुद्धिमता मन को शान्त करना है । चेतना का फैलाव होता है ।

यह चंचलता, तम्स (शारीरिक-मानसिक) आलस्य अशान्ति की लय को तोड़ मन को सक्रिय कर शान्त करना है । संवेदनाएं समस्या बन जाती है । चिन्ता के चक्र में आ जाते है । हम अभिमन्यू की तरह अशान्ति के चक्रव्यूह में फंस जाते हैं । बाहर आना नहीं जानते है। ऊर्जा का प्रबन्धन जरूरी है ।
विचारों को जाने वाली अत्यधिक ऊर्जा बन्द करनी है । शरीर को सक्रिय करने में ऊर्जा को लगाना है ताकि रजस्व बढ़े । तम्स काम नहीं करने देती, नीचे खींचती है । यह गुरूत्वाकर्षण की तरह ठण्डा करती है । रजस सक्रिय करता है । ग्रन्थियों का भेदन कर अवरोधों को हटाना है ।
रक्त संचारण, स्नायु-तन्त्र व हृदय के स्पन्दनों को देखें । उद्दीपन व विश्राम के संवेदनाओं के प्रति सचेत रहना बहुत जरूरी है ।यह आधे घंटे का ध्यान छः घंटे नींद के बराबर है । प्रत्येक सक्रियता (स्टीमुलेशन) जड़ता को तोड़ती है व सिकुड़न को खोलती है । जब सक्रियता को चेतन रूप से देखते हैं तो तत्क्षण हम शिथिल हो जाते हैं । जब शिथिलन जारी रहता है तो सुस्ती आ जाती है । इसे तोड़ने फिर सक्रिय होते हैं । इस तरह बार-बार सक्रिय व शिथिल होते रहने से मन में दबे गहरे तनाव बाहर आ जाते हैं । सक्रियता से तमस दबता है व राजस जगता है । आॅक्सीजन की मात्रा से चयापचयी दर सम्बन्धित है । विश्राम की अवस्था में आॅक्सीजन खपत घट जाती है । शवासन में 10 प्रतिशत आॅक्सीजन खपत घटती है जबकि आवर्तन ध्यान में यह खपत 32 प्रतिशत तक घट जाती है । अर्थात इस ध्यान में विश्राम अधिक मिलता है ।

विधि  अगली पोस्ट में पढ़े ।                                                                                            ( To be continued…..)

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