योग के अनुसार हमारा निर्माता कौन / जीवन का सत्य क्या है?

 समग्र योग चिकित्सा: पंचकोश विवेक

तैत्तेरीय उपनिषद की घटना है कि एक बार महर्षि वरूण से उनके पुत्र व शिष्य भृगु ने जीवन का सत्य जानना चाहा । वरूण ने उसे बताया कि जीवन का सत्य कोई दूसरा आपको नहीं बता सकता है। यह स्वयं को खोजना पड़ता है । जाओ और स्वयं खोजो । PANCH KOSH SCIENCE
भृगु कई दिनों तक तप कर लौटे और बताया कि सारी सृष्टि पदार्थ से उत्पन्न हुई है । यही अन्नमय कोश हम है । आधुनिक विज्ञान भी यही मानता है । लेकिन इसमे सारे प्रश्नों के उत्तर नहीं मिलते हैं । तब महर्षि वरूण ने आगे और खोज करने को कहा ।
कुछ वर्ष खोज कर आया व बताया कि स्थूल शरीर का कारण सूक्ष्म प्राण है । इस प्राण शरीर से ही स्थूल शरीर बनता है । ऋषि ने आगे खोज जारी रखने को कहा ।
भृगु कई वर्षो तप करता रहा । उसने पाया कि मन ही जीवन का कत्र्ता है । सब मनोमय शरीर तय करता है । विचार, भाव मनोमय शरीर के घटक है । अतः जीवन का आधार यह तीसरा शरीर है । जो प्राणकोश व अन्नमय कोश का कारण है ।
महर्षि भृगु के इस उत्तर से भी संतुष्ट न हुऐ व बताया कि जीवन का यथार्थ और गहरे में है ।
भृगु जंगल में साधना कर लौटा व बताया कि जीवन का कत्र्ता विज्ञान, बुद्धि व विवेक है । विज्ञानमय शरीर ही सब कुछ है । यह चतुर्थ कोष है । चैथी पर्त हमारे विज्ञानमय कोश की है । यह अच्छे-बूरे, मेरा-तेरे की बुद्धि से सम्बन्धित, मन का सूक्ष्म स्तर है । इसको ज्ञान द्वारा, समझ द्वारा परिष्कृत किया जाता है । यह विवेक से सम्बन्धित है। विवेक व बुद्धि द्वारा इसको ठीक किया जा सकता है ।
(To be continued…..)

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2 विचार “योग के अनुसार हमारा निर्माता कौन / जीवन का सत्य क्या है?&rdquo पर;

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