दिल के रोग – काॅलस्ट्रोल से कम, घृणा व इर्ष्या से अधिक होते

दिल का दौरा काॅलस्ट्रोल के बढ़ने से ही नहीं पड़ता है ।आधुनिक वैज्ञानिक खोजों से स्पस्ट हे कि  व्यक्ति के मन में जब घृणा व ईष्र्या बढ़ जाते हैं तो उसका दिल कमजोर हो जाता है । वसा से अधिक नफरत इसके लिए जिम्मेदार है । घृणा करने से हृदय पर जोर पड़ता है । आशावादी विचार से अच्छा महसूस होता है । जिससे दिल की ताकत बढ़ती है । प्रेम करने से दिल मजबूत होता है । यहां मतलबी प्रेम की बात मैं नहीं कर रहा हूं । हमारे रक्तचाप पर भावनाओं का बड़ा प्रभाव होता है। भावनाओं के उतार चढ़ाव एवं जल्दबाजी से रक्तचाप बड़ता है। रक्तचाप की असामान्यता हृदय को कमजोर करती है। heart images
अपने भाव जगत को पवित्र व शुद्ध रखना जरूरी है । हम अपनी भावनाओ को संतुलित कर स्वस्थ रह सकतेे हैं । भावनाएं जब विचार को अपने से जब एकरूप कर लेती है तो चमत्कार हो सकते हैं । भावनाओं से हमारी कोशिकाओं के डीएनए प्रभावित होते हैं । शरीर के अच्छे भाव हमे स्वस्थ बनाते हैं । बुरे भाव हमे कमजोर बनाते हैं । भाव हमारे जीवन के निर्माताओं मे से है । भाव हमारी आत्मा/चेतना से जुड़े होते हैं । ये हमे सीधे प्रभावित करते हैं । भाव हमारे शरीर को भी पूरी तरह प्रभावित करते है । हमारे शरीर के निर्माण में भावों का बड़ा योगदान है । बुरे भाव शरीर को बीमार बनाते हैं ।
रूग्ण मन रोग का जनक है । हमारे शरीर में ऊर्जाओं के असंतुलन से, ऊर्जाओं के बाधित होने से, ऊर्जा तरंगो के अस्त-व्यस्त होने से, हारमोन स्त्राव में संतुलन व मर्यादा नहीं रहती है ।
घृणा करना नकारात्मकता है । इससे निराशा के भाव जन्मते है । निराश व्यक्ति जीना नहीं चाहता है । इससे उसकी जीजिविशा कमजोर होती जाती है । वह अपने से नफरत करना लगता है । इससे दिल पर भार पड़ता है ।
अन्दर ही अन्दर ही कुढ़ने वाले अपने हृदय को क्षतिग्रस्त कर लेते हैं । खराब भावों से हृदय खराब होता है । इसीलिए पतले दुबले व्यक्ति को भी दिल के दौरे पड़ते है । हमारे भाव हमारे सीधे डीएनए को प्रभावित करते हैं । खराब भाव आधुनिक शोध के अनुसार डीएनए को विकृत करते है जिससे शरीर विकृत बनता है ।

मस्तिष्क से हृदय अधिक प्रभाव रखता है । उसका विद्युत चुम्बकिय प्रभाव 1500 गुणा अधिक होता है ।

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5 विचार “दिल के रोग – काॅलस्ट्रोल से कम, घृणा व इर्ष्या से अधिक होते&rdquo पर;

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