इच्छा शक्ति से सफलता कैसे पाए ?

वृहदारण्यक उपनिषद् मे लिखा है किः-

जो कुछ तुम हो, वह तुम्हारी प्रबल इच्छा है ।
जैसी तुम्हारी इच्छा है, वैसा ही तुम्हारी संकल्प है ।
जैसा तुम्हारा संकल्प है, वैसा ही तुम्हारा कर्म है ।
जैसा तुम्हारा कर्म है, वैसा ही तुम्हारा भाग्य है ।

I can

अथार्त व्यक्ति अपनी इच्छा एवं सपनों का ही प्ररिणाम होता है । आज हम जो कुछ हैं वह अपनी इच्छाओं के अनुसार हैं । हम जैसा सोचते हैं वैसे ही बनते हैं । तब वैसी ही मनःस्थिति होती है तद्अनुरूप ही कदम उठाते हैं । अपनी सोच के अनुसार ही कर्म करते हैं । क्योंकि हमारी इच्छा से ही संकल्प पैदा होता है एवं संकल्प अनुसार कर्म करते हैं तथा कर्म ही हमारा भाग्य बनाते हैं । क्योंकि कर्मों के अनुसार ही फल आता है । इस तरह हम अपने भविष्य के निर्माता है । इसीलिए नेपोलियन ने लिखा है कि हम ही अपने भाग्य निर्माता हैं । अपना जहाज संसार में अपने सोेच के अनुसार ही चलाते हैं । उसी अनुरूप विजय मिलती है । सफलता प्राप्ति में इच्छा शक्ति की प्रमुख भूमिका है ।

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