क्या भले लोग बुरे लोगों से अधिक है?

 

यहाँ सब स्वार्थीं व बेईमान नहीं है। लेकिन दुःख की बात यह है कि बुरे लोगों का वर्चस्व है। अधिकांश लोग भले व सहायता प्रदान करने वाले है। गुणवान लोगों की यहाँ कद्र नहीं होती है क्योंकि वे संगठीत नहीं है। देश की आजादी हेतु कुर्बानी देने वाले क्या स्वार्थीं थे? क्या सूरज, पानी, हवा, पृथ्वी, आकाश आपसे किराया माँगते है? वेदव्यास से लेकर आज तक लेखक, कलाकार,सृजक आपसे व्यक्तिगत कुछ नहीं लेते है। वे सब आपको ज्ञान, संस्कृति, विचार, भावनाओं से आपको समृद्ध करते है। यह जीवन भले लोगो की अच्छाई के कारण ही चल रहा है।

Good people-Bad peopleकुछ लोग चोर-डाकू, हत्याएँ, बलात्कार करते है इससे सारा समाज बुरा नहीं हो गया। यह हमारी नकारात्मकता है कि हम कुछ बुरे लोगों के आधार पर पूरे समाज को दोष देते है।
अच्छे लोगों में दोस्ती प्रायः कम होती है। क्योंकि अच्छाई हमेशा अकेली रहती है। अच्छाई का अहंकार व्यक्ति को दूसरों से जुड़ने नहीं देता। जबकि बुरे व्यक्ति प्रायः शीघ्र ही दोस्ती कर लेते है। क्योंकि एक साथ बुरा काम करने से परस्पर अपनापन आ जाता है। तभी तो कहाँ जाता है कि दारू पीने वालो की दोस्ती मजबूत होती है। बुराई हमेशा अपने परिवार को बढ़ाती है। जबकि अच्छाई अकेले रहना पसन्द करती है। समय आ गया है कि अच्छे लोगों को भी एक-दूसरे को सहयोग करना होगा।

हमें इस धारणा को समाप्त करना है कि सब लोग खराब है। बेवजह अनेक लोग बहुत बढि़या है। मानवता, जीवन, हमारी उन्नति इन्हीं को बदोलत है। यहाँ सर्वत्र प्रेम है, परोपकार के भाव है, सत्य है, नैतिकता है। खुशियाँ बाँटने को बहुत लोग तत्पर है। अच्छाईयाँ समाप्त नहीं हुई है-हम देख नहीं पा रहे है?

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