अध्ययन हेतु दूर जाती बिटिया को पत्र

प्रिय बेटी ,
तुम पहली बार पढ़ने के लिए घर से बाहर दूर जा रही हो । हमारी शुभकामनाएं सदैव तुम्हारे साथ है । एक माली जैसे पौधे को नर्सरी में बड़ा करता है, लेकिन एक दिन उसे कोई अपने बगीचे में बड़ा करने ले जाता है। वैसे ही तुम्हे आगे बढ़ने घर से दूर जा रही हो । एक जहाज को समुद्र की यात्रा पर जाना ही पड़ता है । वहां आंधी, तुफान, बर्फ, डाकुओं आदि अनेक आघातों से उसका सामना होता है ।Sarvagya daughter लेकिन इन विपरित स्थितियों में ही जहाज की क्षमता का परीक्षण होता है । टाईटैनिक की तरह तुम पहली यात्रा मंे डूबने वाली नहीं हो । घर में रह कर कुशलता व क्षमता हासिल नहीं की जा सकती है। एक न एक दिन सबको घर से दूर जाना पड़ता है । अपनी क्षमता जगाने विपरित परिस्थितियों से जुझना पड़ता है ।
ओर, तुम तो विश्वप्रसिद्ध प्ण्प्ण्ज्ण् संस्थान के बरगद के नीचे जा रही हो । वहां जीवन व प्रतिभा के अनेक आयाम दिखेंगे । तरह-तरह की दक्षता व कुशलता के व्यक्ति मिलेंगे । साथ ही नकारात्मक श्रेणी के कुछ लोग भी कहीं मिल सकते हैं । उनको कैसे सुलटना ? उक्त कला आप स्वतः सीखेंगी ।
परदेश में अपने पराये को पहचानने के अनेक अवसर मिलेंगे । सबको सजगता से देखते हुए अपने पक्ष में उन्हे कैसे करना ? यह कला आप जानती है । व्यक्ति को उसकी आवाज, देहभाषा एवं भाषा से समझ कर तद्नुकूल व्यवहार करना तुम्हे आता है। संवाद से कैसे रिश्ते मधुर बनाये जा सकते हैं । अपरिचित एवं अयोग्य को भी अपने पक्ष मेे प्रयोग करना सिखो । एक सुनहरा अवसर मिला है जहां तुम अपनी धार पैनी (तेज) कर सकती हो ।
शारीरिक रूप से दूर होने से तुम घर से दूर न हो । प्रेम व समय से भौगोलिक दूरियां बड़ी नहीं होती है । तुम सदैव हमारे पास व साथ हो ।
कोई कृत्य अपनी अन्तरात्मा को कोसे, ऐसाकोई कार्य न करें । अपना सामना स्वयं कर सके । उन लोगों से, त्ववताप प्ण्प्ण्ज्ण् से सर्वज्ञा कितना सीखती है, महत्वपूर्ण यह है । 4 वर्ष की ठण्ज्मबीण् वाले से ज्यादा एक माह मेें कैसे सीखें ? यह प्रश्न जीतनी बार आप अपने से पूछेगी, उतनी ही तुम्हारी सीखने की क्षमता बढ़ेगी ।
तुम प्रतिभावान, क्षमतावान, साहसी हो, योग्य हो, ओर उसमे कई गुणा वृद्धि कर शीघ्र लौटो । स्व-प्रबन्धन में कुशलता अति आवश्यक है ।
मेरी बातों को उपदेश न समझे । यह मेरी समझ व क्षमता है जिसको तेरे से शेयर कर रहा हूॅ ।
स्वागतातुर,
पापा-मम्मी

2 विचार “अध्ययन हेतु दूर जाती बिटिया को पत्र&rdquo पर;

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