सफलता का मंत्रः रतन टाटा के अनुसार :अंतिम भाग

3. गहरी पर्यवेक्षण क्षमता
जीवन में सफलता प्राप्ता करने के लिए हमें आखं और कान खुले रखने चाहिए। वस्तुओं, घटनाओं, व्यक्तियों व उनके व्यवहार का बारीकी से अवलोकन करना जरुरी हैं। व्यवस्था पर अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए व्यवस्था को समझना जरुरी हैं। सभी चीजें शब्दों से न समझी जा सकती हैं न समझाई जा सकती हैं। इसलिए अशाब्दिक संप्रेषण की कला भी आनी चाहिए। शब्दों के पार का संप्रेषण आना चाहिए। व्यक्ति अपनी देह भाषा से सत्तर प्रतिशत बोलता हैं। शब्द तो मात्र संकेत करते हैं। इसलिए आगे बढ़ने के लिए देह भाषा का ज्ञान जरुरी हैं। इसी से समझ पैदा होती हैं। देश, काल, परिस्थिति, वित, नियम-कायदे, रूख को ध्यान में रख कर निर्णय लेना बुद्धिमता है। जल्दबाजी न करना, न निर्णय करने में देरी करना । पर्दे के पीछे को समझना सफलता पाने के लिए जरुरी हैं। व्यक्तियों के पीछे भावार्थ क्या है ?
4. विनम्रता
‘‘विद्या ददाति विनयम‘‘ उच्च अधिकारियों के पास शक्ति होती है । अतः उनमे अंहकार रखने या प्रदर्शन की जरूरत नहीं होती है । वास्तव में शक्तिशाली को उसके प्रदर्शन की जरुरत नहीं होती हैं। सामान्यतः असमर्थ लोग शक्ति का प्रदर्शन करते हैं। समर्थ व्यक्ति को हमेशा विनम्र होने की जरुरत हैं। उनके निर्णय से बहुत से लोग प्रभावित होते हैं ।
उपरोक्त गुणों के होने पर मिस्त्री टाटा गु्रप के चेयरमैन हो सकते हैं तो कोई भी इन गुणों को जीवन में उतारकर आगे बढ़ सकता हैं।

सफलता का मंत्रः रतन टाटा के अनुसार :अंतिम भाग&rdquo पर एक विचार;

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s