सफलता का मंत्रः रतन टाटा के अनुसार- दूसरा भाग

2. बुद्धिमता
मनुष्य के पास मात्र ज्ञान, सूचना या जानकारी होने से सफलता नहीं मिलती । ज्ञान का उपयोग करने की कुशलता होनी चाहिये । वास्तव में ज्ञान का उपयोग अपने पक्ष में करने की कला को ही बुद्धि कहते हैं। मात्र आई. क्यू. से काम पूरा नहीं होता हैं। जीवन में भावनात्मक सन्तुलन (ई. क्यू.) की बड़ी आवश्यकता हैं। परिस्थिति, काल, देश केे अनुसार निर्णय करने में बुद्धि की बड़ी भूमिका हैं। अपनी मात्र धारणाओं व दृष्टि अनुसार न चलें । विवेक से तय करें । तोल मोल के फैसले ले ।
अपनी अक्ल से चलें । चमचों की आंख से न देखें ।
हार्वड विश्वविधालय के प्रोफेसर गार्डनर ने बताया है कि बुद्धि एक तरह की नहीं होती हैं। बहुमुखी बुद्धिमता की धारणा दी है । उनके अनुसार व्यक्ति में मुख्यतः सात तरह की बुद्धि होती हैं। इसमें से प्रत्येक का विकास अलग-अलग व्यक्तियों में अलग-अलग मा़त्रा में होता हैं।
1. तार्किक/गणितीय
2. भाषायी/शाब्दिक,
3. शारीरिक/गतिक,
4. संगीतीय/आवाज,
5. दृश्य/आकाशीय,
6. दूसरे व्यक्यिों से सम्बन्धित,
7. आत्मिक, (इन्टर परसनल)
जानकारी, ज्ञान, सूचनाओं को अपने पक्ष में प्रयोग करना । उस आधार पर सटीक निर्णय करना ।

( To be continued…)

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