प्रसन्न रहने खुद को कैसे करे माफ?

स्वंय को माफ करो । खुद को कुचलना बन्द करों । अपने उपर अत्याचार सबसे बडा गुनाह है । खुद को क्षमा करने से खुदा मिलता है । अपने पास आने स्वंय को स्वीकारना पडता है । जैसे भी हो आप आप हो । अपने को अपनाने से भटकन मिटती है । अपने को जाना-मानों तभी शान्त हो जाओगे । जो खुद के पास न आ सकते है वे किसी के पास जाकर भी अधूरे ही रहते है । अपने को जाने बिना पर को नहीं जान सकते ।
अपनी गलती भी मात्र अपने से न हुई, सम्बन्ध, विचार, सपने, शिक्षा, अहम्, राग-द्वेष, लालच सब जिम्मेदार है । तुम मात्र तुम ही नही हो । अन्य स्थितियां, आदतें, वस्तुऐं, प्रकृति, बेहोशी, नकल की वृत्ति सब साथ है ।
हमें माफ करने की प्रक्रिया में स्वंय का ज्ञान होता है। अघ्यात्म का प्रवेश होगा । सूर्य की, सत्य की किरण जीवन में प्रवेश करेगी । खुद से नाराज होकर ही दूसरों को महत्व देते है ।
जीवन हमसे बाहर नहीं है । कहीं अन्यत्र नहीं है किसी ओर जगह, व्यक्ति या समय में नहीं है । जिन्दगी सपनों में, शब्दों में कईयों में नही है । वह अभी में है । यह क्षण आनन्ददायक है तो सब ठीक है । बलात्कार, हत्या, जबरदस्ती करने कराने में भय है । आकुलता है, अतः सुख नही है । यह वर्तमान में जीना नही है । बदला लेना, सजा देना, अतीत में होना है । कल खुश नहीं रहना है । हो सकता है तो अभी खुश होना है ।
सुख अभी और यही है तो है । अन्यथा कहीं नही है ।
मुझे मुक्ति नहीं चाहिए । मोक्ष नहीं चाहिए । अगर मैं अभी मुक्त नहीं हूॅ तो भविष्य मे मुक्त कैसे हो सकता हूॅ। भविष्य का जन्म इस क्षण में से होकर होता है ।

2 विचार “प्रसन्न रहने खुद को कैसे करे माफ?&rdquo पर;

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s