अपनी जिम्मेदारी का बोध कराता आमिर खान का शो सत्यमेव जयते

आमिर खान द्वारा तैयार टेलीविजन शो सत्यमेव जयते अपने नाम के अनुरूप सार्थक है । यह एक तरह का फोटो निबन्ध है । इसमें हमारे समाज की एक समस्या को उठाना, उसकी भूमिका बनाना, पीडित व्यक्तियों को खोज कर शो में लाना, प्रसंग सहित व्यक्तियों के दर्द को दिखाना, समस्या की गंभीरता को सांख्यिकी के द्वारा दिखाना, इस पर हुए शोध को दिखाना, समस्या का समाधान पेश करना अपने आप में अनूठा कार्य है । इस शो ने इसे एक जीवंत मुद्दा बना दिया

टेलीविजन का आविष्कारक इस शो को देख कर अपना आविष्कार पर इतरा सकेगा । इससे टेलीविजन की ताकत का अन्दाज लगता है । सामाजिक समस्याओं के निदान में टेलीविजन व सितारों की भूमिका स्पष्ट होने लगी है । वास्तव में यह शो हमें अपने भीतर झांकने को विवश करता है । हमारी ज्ञान, समझ व अनुभव को गहरा करता है । समस्या में अपनी भूमिका को दिखाता है, स्वयं समाधान का हिस्सा कैसे बने यह भी दिखाता है।
सत्यमेव जयते का प्रथम शो कन्या भ्रुण हत्या पर आधारित था । कन्या भ्रुण हत्या हमारे समय की बडी समस्या है । इस शो ने इस पर सोचने के लिए हम सबको बाध्य किया है । इसमें पूरे देश में फेैेली गलत धारणा का खण्डन किया कि गरीब व अशिक्षित कन्या भ्रुण हत्या करते है । यह अमीर व शिक्षित लोगों का शगल है । स्त्री विमर्श इनके मन में ज्यादा है। वंश को चलाने की फितरत इनके भेजे मेें है। इसके सभी पहलुओं की जांच पडताल गहराई से की गई है ।इस शो में स्टिंग आॅपरेशन करने वाले दो पत्रकारों मीना शर्मा व शक्तावत का साक्षात्कार भी दिखाया । इन्होनें एक गर्भवती महिला को साथ लेकर पांच माह तक स्टिंग आपरेशन किया, लेकिन आज तक किसी डाक्टर को सजा न मिली। बल्कि राज्य की भिन्न-भिन्न अदालतों में वाद चलने से गवाहियाँ देते रहे है। किसी डाक्टर को अभी तक सजा न मिली। कन्या भ्रुण हत्या पर उनके आॅपरेशन से बनाम गए केसेस पर आमिर ने राजस्थान के मुख्यमन्त्री से मिल कर फास्ट ट्रेक कोर्ट की स्थापना हेतु अपील करने की घोषणा की है । जो समस्या के निदान की दिशा में एक सार्थक पहल है ।
जैसा कि आमिर ने बताया है कि हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं है। इस विषय पर यह संजिदा प्रस्तुति है। प्रस्तुतीकरण बहुत प्रभावोत्पदाक है। इसमें आमिर ने कोई लटके झटके भी नहीं दिखाये हैं।
इस ब्लाग का मकसद वैसे भी स्वयं को प्रेरित करना है। यह शो भी स्वयं को बदलने की प्रेरणा देता है। हम अपनी जिम्मेदारी समझंे व महसूस करें कि इस गुनाह में हमारा हाथ भी है। हमारे दिल को यह बात छूनी चाहिए। हमें ही यहां बदलना है, किसी और को नहीं बदलना है। हम निर्णय करें कि हम कन्याभू्रण हत्या के कृत्य में किसी भी रुप में शामिल नहीं होगें। लिंग परीक्षण का विरोध करेगें व इस तरह के कृत्य का साथ न देंगे व खुल कर विरोध करेगें।

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कृष्ण कुमार यादव का आलेख : सत्यमेव जयते

आगे पढ़ें: रचनाकार: कृष्ण कुमार यादव का आलेख : सत्यमेव जयते http://www.rachanakar.org/2008/08/blog-post_4756.html#ixzz1ujYeUNe1

4 विचार “अपनी जिम्मेदारी का बोध कराता आमिर खान का शो सत्यमेव जयते&rdquo पर;

  1. आपने इस महान कार्यक्रम की प्रशंसा बहुत ही सुन्दर शब्दों में की है। सचमुच अमेरिका के अश्लील और समाज को बिगाड़ने वाले कार्यक्रमों के स्थान पर ऐसे सार्थक और प्रेरणास्पद कार्यक्रम दिखाये जाने चाहिये। टी.वी. के लिए अभी तक कोई सैंसर बोर्ड नहीं है। इसलिए टी.वी. के लिए तो फिल्मों से भी अधिक सशक्त सैंसर बोर्ड होना चाहिये। क्योंकि फिल्म देखने तो थियेटर जाना पड़ता है, जबकि टी.वी. तो आजकल हर घर में दिन भर चलता है और पूरा परिवार साथ बैठ कर देखता है।

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