महावीर जयन्ती की हमारे जीवन में प्रासंगिकता

आज महावीर जयन्ती है । हम सबको उनकी जीवन में उपयोगिता पर विचार करने की जरूरत है । महावीर जयन्ती तो हम 30-40-50 वर्षों से मनाते आए है । प्रभात फेरी, स्वामी वत्सल, संतों के दर्शन, पूजन-पाठ करते आ रहे है । लेकिन हम वहीं के वही है, वैसे ही है जैसे थे । फिर क्या अर्थ है जयन्ती मनाने का ? लेकिन हमारा अंधकार बना हुआ है । महावीर की रोशनी हमारे भीतर नही पहुंची है । हमारा दीपक नही जला है । जबकि ज्योति प्रकट करने के लिए जयन्ती मनाते है लेकिन ज्योति जलती नही है । आखिर हम उनकी जयन्ती क्यों मनाते है ?
मैं महावीर का अनुयायी नही प्रेमी है । मैं महावीर जयन्ती नहीं मनाने आया हूॅ । हम सब के जीवन में महावीर का प्रवेश हो इसकी प्रार्थना करता हूॅ । महावीर को समझने की चाबी है स्वंय को समझना । जो अपने जीवन में जितना उतर सकेगा वही उतना महावीर को समझ सकेगा । महावीर को समझना हो तो बहुत गहरे में स्वंय को समझना और रूपान्तरित करना ज्यादा जरूरी है । महावीर को पूजने की जरूरत नही है, उन्हे जीवन में उतारने की आवश्यकता है । महावीर चालीसा पढने से कुछ नही होना है । उनका मन्दिर बनाने की जरूरत नही है, स्वंय का निर्माण करने की आवश्यकता है । महावीर जयन्ती इस तरह मनाओ की स्वंय की जयन्ती मन जावे ।

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