जीवन में मनोदशा का महत्व

व्यक्ति अपनी मानसिक स्थिति से ही संचालित होता है । मनोदशा अच्छी होने पर व्यक्ति आशावादी एवं उत्साह से जीता है अन्यथा वह उदासीनता के अंधेरे में घिर जाता है । उदासीनता अन्ततः व्यक्ति को निराश एवं हताश करती है । अपनी मनोदशा अच्छी रखने के लिए उजले पक्ष को देखना पडता है । मनोदशा अच्छी होने पर व्यक्ति स्वंय को पसन्द करता है । स्वंय को पसन्द करने वाला दुसरों का भी सम्मान करता है । जो स्वंय से ही टूट जाता है वह औरो को भी निराश ही करता है । मनोदशा अच्छी नही होने पर मनोरोग बढते है ।
मनोरोग केंसर से भी अधिक घातक है जबकि समाज मनोरोगों को रोग ही नही मानता है । मनारोग शारीरिक व्याधि से अधिक घातक है । मनस्थिति ठीक नही रहने पर व्यक्ति कोई न कोई नशे का आदि हो जाता है । चाहे वो सिगरेट, गुटखा, पान या शराब का सेवन हो ।
मनोरोगी को जीवन में कुछ भी अच्छा नही लगता है । अवसादग्रस्त व्यक्ति कई बार आत्महत्या तक कर लेता है । मन के हारे हार है मन के जीते जीत । मन को प्रसन्न रखना व मन से प्रसन्न रखना जीने के जरूरी आॅक्सिजन है ।
दुनिया के अधिकांश लोग शरीर से नही मन के रोगी है । मन के रोगी स्वंय को ठीक नही कर सकते अतः उनसे आदर्शवादी या सकारात्मक सोच के उपदेशों से वो ठीक नही हो सकते । मनोरोग के कई स्तर होते है । चिडचिडा होने से लेकर आत्महत्या करने तक का अलग-अलग स्तर होता है । मनोरोगी को समाज रोगी के रूप मे स्वीकार नही करता जिससे मनोरोग ओैर बढता जाता है ।

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3 विचार “जीवन में मनोदशा का महत्व&rdquo पर;

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