सहज समाधि ध्यान करना चाहिए या नहीं?

तनावभरी जिन्दगी में शांति पाने सहज ध्यान करें। अपनी अशान्ति, बैचेनी, आकुलता, जल्दबाजी से मुक्त होकर जीवन का रस भोगने सहज ध्यान करें। इससे हमें राहत मिलती है। यह अन्धकार से प्रकाश में जाने का पथ है। इससे जीवन में सन्तोष आता है, स्वीकार भाव आता है, आनन्द आता है।

श्री श्री रविशंकर, आर्ट आॅफ लिविंग द्वारा संचालित सहज समाधि ध्यान  करने का अवसर मिला। ध्यान को अनुभव करने का, ध्यान को समझने का अवसर मिला व स्वयं को समझने का मौका मिला। इसकी फीस एक हजार रुपया है। अतः इसको करना चाहिए या नहीं है। अतः इस पर समीक्षा करना मैं उचित समझता हूँै।

सहज ध्यान का अर्थ समता में आकर प्रकृतिस्थत होना है। सजगता पूर्ण विश्राम में ध्यान है। इसमें स्वयं को शिथिल करते हुए विश्राम में रहना है। कार्य करते हुए समाधिस्थ होना है। इसमें प्रयत्न की जरुरत नहीं है। सारे प्रयत्न छोड़ने है। मात्र स्वयं को मिटाना है। यह हमारी खोई अवस्था है जिसे पुनः प्राप्त करना है। इसकी विधि बनाने की मुझे आज्ञा नहीं है। ध्यान का अर्थ एकाग्रता नहीं है बल्कि ध्यान का परिणाम एकाग्रता है।

हमारे मन पर अनेक बोझ है। हम सब भावनात्मक रुप से घायल है। हमने अपने को दबा रखा है। समाज और परिस्थिति के कारण बहुत से जहर हम पीते है। इन सब की निकासी ध्यान द्वारा ही होती है। ध्यान स्वयं की सफाई है। यह हमारी चेतना का भोजन है।
सहज ध्यान मन के चारों स्तरों चेतन स्तर, अचेतन स्तर, अवचेतन स्तर, सहचेतन स्तर पर कार्य करता है। जैसे स्पंज को पानी में भिगोने पर वह पानी को शोख लेता है। फिर स्पंज में जमी धूल व बन्द छीद्रों को खोलने के लिए सुई चुभानें पर गन्दगी निकल जाती है वैसे ही मंत्र के उच्चारण द्वारा चेतना के स्तरों में जमा अवरोध दूर हो जाता है।
हमारी चेतना के चार तल होते है।

1. जाग्रत अवस्था-इसमें हम सजग रहते है, विश्राम नहीं मिलता है।
2. सुसुप्ति-यह विश्राम की अवस्था है, जाग्रत नहीं रहते है। इसमें हम निद्रा में रहते है।
3. स्वपन-इसमें हम न सजग रहते है, न ही विश्राम में रहते है।
4. तुरीय अवस्था-इसमें हम सजग रहते हुए विश्राम में रहते है। यह ध्यान की अवस्था है।

ध्यान में विचारों का आना सहज है इसे अपनी कमजोरी न माने। इन विचारों को स्वीकारें, इनसे इनकी मृत्यु हो जाएगी। अन्यथा विचारों को महत्व देने से ऊर्जा मिलने पर ये और बढे़गें। इसमें विचारों को स्वीकार कर उनके प्रति साक्षी भाव रखें।

अपने मंत्र का आदर करें। वह आपके गुरु द्वारा दी गई ध्वनि रुप में ऊर्जा है। शक्ति पात स्पर्श द्वारा, दृष्टि द्वारा व ध्वनि ऊर्जा को मंत्र बनाकर दी जाती है।

सहज समाधि ध्यान करना चाहिए या नहीं?&rdquo पर एक विचार;

  1. Dear All,
    Sahaj Marg Meditation of SRCM,Chennai is very use full for our life. It is beset food for soul.
    Sahaj Marg Meditation technique any body can learn free of charge through Precect appointed and working in all over world.This technique is based on Vevikanandas Raj yoga. in this practice transmission power used by trainer .Morning Meditation, Evening Cleaning and Night Prayer is important component of this system.
    In Udaipur If you want to learn moreabout this system you may contact my address given below.

    Withregards,

    Dr. Rakesh Dashora
    Prefect(Trainer) and Centre Incharge
    Srcm, Udaipur
    M-09414758214
    .

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s