तम्बाकू कैसे छोड़नी: मित्र का अनुभव

मेरे मित्र श्री आर एस बोहरा, वरिष्ठ कर सलाहकार ने गत माह अपनी 35 वर्ष पुरानी तम्बाकू खाने की आदत छोड़ दी। व्यसन हमेशा दो ही तरीके से छूटते है या तो आत्मबल से या दैवबल से। पहले भी बोहरा कई बार संकल्प छोड़ने का प्रयत्न कर चुक है लेकिन दो-तीन घंटे से अधिक नहीं चला तब उन्होंने उन्होंने सोचा कि मैं दैवबल को पुकारु तो शयद मेरा व्यसन छुट जाएं या विचार कर राते को सोते समय रामायण के प्रंसग विभीषण का राम से प्रथम मिलन पर यह पूछना कि मैंने कानों से आपका सुयष सुना है। विभीषण ने कहाँ कि ‘‘श्रवण सुजसु सुनी आयहु प्रभु भंजन भव भीर, त्राहि-त्राहि आरति हरन सरन सुखद रघुबीर।’’ तब श्रीराम बोले हे विभीषण ‘‘जो नर होही चराचर द्रोही, आवे सभय सरन तकि मोहि, तजि मद मोह कपट-छल नाना, करहुँ सध्य तेहि साधु समाना।’’ अर्थात् विभीषणजी कहाँ कि महाराज मैंने ऐसा सुना है कि आपकी शरण अत्यन्त सुखदायी है और आप शरणागत को भयमुक्त कर देते है। श्रीराम बोले हे विभीषण यदि कोई मनुष्य समस्त विश्व का द्रोही हो जाएं (अर्थात् पूरे जगत से दुश्मनी मोल ले ले) परन्तु वह भयभीत होता हुआ भी कपट समस्त छल छोड़ कर मेरी शरण तक आ जाएं तब मैं उसे भयमुक्त करके उसे नवीन बना देता हूं और स्वाभाव साधु समान कर देता हूं।
इस प्रंसग से प्रेरित होकर अनुसार श्री बोहरा सोते वक्त प्रभु श्रीराम से विनती करते है कि मैं भी तेरी शरण आने को तैयार हूँ। मेरा तो तम्बाकू के अतिरिक्त कोई दुश्मन भी नहीं है। प्रभु फिर मैं आपकी कृपा से वंचित क्यों। मेरे को इस व्यसन रूपी नागपाश से मुक्त करें।
सुबह उठकर स्वतः ही श्रीनाथ जी जाने का विचार आता है एवं नाथद्वारा जाकर 4 दिन तक वह श्रीनाथजी जाकर प्रभु मन्दिर में रहे, मन्दिर में राधे-राधे का जाप जपते रहे।
निकोटिन की कमी के कारण 72 घंटे तक तम्बाकू बार-बार उठती रही। लेकिन उन्होंने निकोटिन किसी भी रूप में नहीं ली। मुँह में तुलसी पत्र डालकर राधे-राधे जपते रहे। तीन दिन बाद तम्बाकू की तलब उठनी बन्द हो गई किन्तु शारीरिक नियमों के अनुसार सरदर्द, कब्ज, सुस्ती आना, थकान आना, नींद उड़ जाना इत्यादि हुए लेकिन उन्होंने राधे-राधे के जाप कर उनका मुकाबला किया एवं साथ ही चिकित्सकीय सेवा ली। आज उन्हें सफलता पूर्वक निकोटिन से मुक्त हुए दो माह हो चुके है।
विचारणीय बिन्दु यह है कि अगर एक बोहरा 35 वर्ष पुरानी आदत संकल्प व श्रद्धा से छोड़ सकता है तो हम किसी भी व्यसन को क्यों नहीं छोड़ सकते है।
इच्छुक व्यक्ति से निवेदन है कि इस सन्दर्भ में यहाँ यह भी उल्लेखित करना उचित होगा कि जाॅन आर पोलिटो ने अपनी वेबसाइटhttp://whyquit.com/पर एक पुस्तक फ्रीडम फ्रोम निकाटिन एन्ड जर्नी टू होम से भी मदद ली जा सकती है।
व्यसन पुनः हमें न घेर लें इसलिए याद रखें कि आज निकोटिन नहीं, किसी कीमत पर नहीं।

6 विचार “तम्बाकू कैसे छोड़नी: मित्र का अनुभव&rdquo पर;

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