आगे बढ़ना है तो नकारात्मकता, निन्दा में समय नहीं खोए

जीवन में 20 प्रतिशत समय अगर पछताने, बुराई करने, झगड़ने व रोने में खोते है तोे 20 वर्ष इसमें निकल जाते है। मेरी 55 वर्ष की आयु होने से 11 वर्ष मैं इसमें खो चुका हूँ। अब एक मिनट भी नकारात्मकता में नहीं खोना चाहता हूँ। अतः अब शिकायतें करने में समय नहीं गँवाना है। दूसरों की आलोचना, निन्दा करने व दोष खोजने में समय नहीं लगाना है। नींद न आए तो अध्ययन व लेख में डूबना है। नींद आने का इन्तजार कर व्यग्र नहीं होना है।
मेरा जीवन अपना है। इसमें व्यर्थ दूसरों को कब्जा नहीं करने देना है। जब हम अपने प्लाट पर कब्जा नहीं करने देते है फिर मन पर चर्चा कर कब्जा अप्रत्यक्ष रूप से न करने दें।
जब भी कभी दूसरों की चर्चा करो तो रुक कर सोचो कि इसका प्रयोजन क्या है? अपने भटकाव पर तुरन्त रोक लगााओ। समय से किमती क्या है?
यह जीवन इस तरह सोने के लिए नहीं मिला है। अपने समय की भावनाओं व ऊर्जा को व्यर्थ मत बहाओ। इनकी कद्र करो। यह तुम्हारा जीवन है। इसको सँवारने की जिम्मेदारी तुम्हारी है। इसके लिए किसी अन्य को दोष देना ठीक नहीं है। जब आप ही दूसरों के यहाँ गिरवी होना चाहते हो तो करो व्यर्थ की चर्चा।
वैसे हम अपनी उम्र बढ़ा नहीं सकते है। लेकिन चर्चा में जाती उम्र को बचा सकते है। अपनी इस तरह की मूच्र्छा के प्रति सजग होना जरुरी है।
अवांछनीय को गाली देना उसको मूल्य देना है। अपना समय देना बड़ा मूल्य है। जो उपेक्षा के लायक है उनको चर्चा कर उनको नैनन में मत बसाओं। अयोग्य की उपेक्षा कर अपनी उम्र बढ़ाओं।

4 विचार “आगे बढ़ना है तो नकारात्मकता, निन्दा में समय नहीं खोए&rdquo पर;

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