जीवन में सफल होने श्वास से प्राणऊर्जा कैसे बढ़ाएं?

प्राणऊर्जा विकसित करने के लिए श्वास का प्रयोग करें सफलता का प्राणऊर्जा से सीधा सम्बन्ध है। श्वास की क्रिया हमारे नियन्त्रण में है भी और नहीं भी। यह ऐच्छिक और अनैच्छिक दोनों है। प्राणायाम से प्राणऊर्जा बढ़ती है। तभी तो स्वामी रामदेव ने इसके द्वारा अनेक रोगियों को ठीक किया है। तभी तो प्रतिदिन प्राणायाम करने पर बल दिया जाता है।

जब हम इस संसार में आए तो हमारी सबसे पहली क्रिया क्या थी? हमने सांस अंदर ली। और हमारेे जीवन की आखिरी क्रिया भी श्वास होगी। तो इस पहली संास और आखिरी सांस के बीच में ही हमारा सारा जीवन है। शरीर के 80 प्रतिशत विषैले तत्व ;ज्वगपदेद्ध सांस के द्वारा बाहर निकलते हैं। साधारणतया हम अपने फेफड़ों की सिर्फ 30 प्रतिशत क्षमता ही उपयोग में लाते हैं।

हम अपने मन को, विचारों के स्तर से नियंत्रण में नहीं रख सकते। जब सोने से पहले हम किसी वस्तु या व्यक्ति के बारे में सोचना नहीं चाहते तो क्या होता है? वही वस्तु या व्यक्ति बार-बार हमारे मन में आता रहता है और हम सो नहीं पाते। मन का एक बहुत ही सरल व सहज नियम है-हम जिसका भी विरोध करेंगे तो उतना ही उछल कर हमारे पीछे आएगा ;ॅींजमअमत ल्वन तमेपेज ॅपसस चतमेपेजद्ध । मन को तो हम सीधे-सीधे पकड़ नहीं सकते, लेकिन सांस को महसूस कर सकते हैं। हमारे क्रियाशील बाह्य संसार और भीतर की मौनयुक्त अंतरआत्मा के बीच जो सेतु है वह है सांस। अगर हम अपनी सांस के साथ काम करना सीख जाएं तो मन और विचारों पर भी नियंत्रण कर सकते है। ये पतंग उड़ाने के समान ही है, हमारा मन पतंग की डोर के समान है। जब हम ज्यादा से ज्यादा अपनी सांस के साथ कार्य करना सीख जाएगें तब हम पहचानेगें कि सांस का असर मन पर कैसे पड़ रहा है।

प्राणऊर्जा बढ़ाने में निम्न प्राणायाम सहायक है।
1. कपाल भाति
2. उज्जयी प्राणायाम
3. भ्रामरी प्राणायाम
4. भ्रस्त्रिका प्राणायाम

 ५ नाड़ी शोधन

प्रातःकाल घूमने से भी प्राणऊर्जा बढ़ती है। विपस्ना करके भी प्राणऊर्जा बढ़ायी जा सकती है। श्री श्री रविशंकर द्वारा संचालित आर्ट आॅफ लिविंग का बेसिक कोर्स एवं स्वामी रामदवेजी का शिविर करके भी प्राणऊर्जा बढ़ाने की विधि सीखने मिलती है।

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