सफलता पाने हेतु पेशे अनुरूप व्यवहार व भाषा जरूरी

हमें अपने पेशे के अनुरूप व्यवहार करना चाहिए एवं उसी अनुसार भाषा बोलनी चाहिए। दूसरों से जुड़ने में भाषा की बड़ी भूमिका है। तभी तो कहां जाता है कि मीठी वाणी बोलनी चाहिए। वैसे हर पेशे की अपनी विशेषताएँ एवं सीमाएं होती है। पुलिस का व्यवहार व उसकी भाषा व डाॅक्टर के व्यवहार व भाषा में भेद होता है। पेशे के अनुरूप हमें भाषा का प्रयोग करना चाहिए। मैनेजर की भाषा कड़क व आदेशात्मक हो सकती है। मार्केटिंग की भाषा लाभ आधारित विश्लेषणात्मक व नम्र होनी चाहिए। परिवार मंे भाषा आपके व्यवसाय स्थल की भाषा से भिन्न होनी चाहिए। प्रारम्भ में स्त्री के लिए पीहर की भाषा व ससुराल की भाषा में अन्तर होता है।
एक डाॅक्टर की भाषा बहुत मृदु व रसीली हेानी चाहिए क्योंकि रोगी दवाइयों से ज्यादा डाॅक्टर के प्रति विश्वास होने से ठीक होता है। पुलिस की भाषा बोलने वाला डाॅक्टर सफल नहीं हो सकता है। मरीजों का विश्वास जीतने डाॅक्टर को अपने व्यवहार को बढि़या, मीठा व अपनत्व भरा होना चाहिए। अच्छा डाॅक्टर उसके चिकित्सकीय ज्ञान से अधिक अपने व्यवहार से बनता है। तनुक मिजाज, आक्रामक व ताने मारने वाली भाषा उसके पेश में उसे डूबा देती है। व्यवहार भाषा, उतार-चढ़ाव, सही शब्दों के चयन व वक्ता की देह भाषा से बनता है। कुशल व सफल डाॅक्टर अपनी बोली से मरीजों का विश्वास जीत सकता है।
वाणी से नाराज करना अनुचित है। अपनी बोली तो दूसरों को जीतने का अस्त्र है उसे दूसरों को खोने का साधन न बनाएँ।संवाद जुड़ने के लिए करें, नाराज करने के लिए नहीं। तभी तो कहावत है कि जीव्हा का घाव तलवार के घाव से भी गहरा होता है। तलवार का घाव समय के साथ भर जाता है लेकिन गलत प्रयुक्त भाषा अक्षम्य होती है, व्यक्ति कभी उसे भूलता नहीं है।

6 विचार “सफलता पाने हेतु पेशे अनुरूप व्यवहार व भाषा जरूरी&rdquo पर;

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s