भावनाओं का महत्व:आई क्यू से बढ़कर ई क्यू होता है

मनुष्य का जीवन भावप्रधान है। जीवन भावना प्रधान होता है। हम सब भावों से संचालित होते है। आनन्द , प्रसनन्ता, उत्सव एवं संतोष एक भाव ही तो है।प्रेम-घृणा, मेरा-तेरा,पाना-खोना, क्रोध-क्षमा, हार-जीत, श्रृद्धा-सन्देह, का महत्व भावनाओं से ही होता है। यही तो हमारे जीवन के आधार है। भाव विचार से भी सूक्ष्म होते है। भावों को व्यक्त करने के लिए कई बार हम विचारों का सहारा लेते है।

आई क्यू से बढ़कर ई क्यू होता है। आई क्यू का अर्थ इन्टेलिजेन्स क्योंषन्ट अर्थात् बौद्धिक गुणांक। ई क्यू का अभिप्राय इमोसनल क्योंशन्ट अर्थात् भावनात्मक गुणांक। आई क्यू बुद्धि के स्तर को दर्शाता है जबकि ई क्यू भावनात्मक संतुलन के स्तर को दर्शाता है।

जो अपनी भावनाओं का नियन्त्रित कर सकता है, वह अपने जीवन को भी नियन्त्रित कर सकता है। हमारे जीवन में सुखी होने के लिए भावनात्मक गुणांक का अधिक होना जरुरी है। आज यह बौद्धिक गुणांक से ज्यादा जरुरी है। मात्र ज्ञान से जीवन में तृप्ति और शान्ति नहीं मिलती है। जीवन में संतुलन भावनाओं के समायोजन से ही आता है।
इस पर एक सच्ची घटना याद आती है। किसी एक कारपोरेट घराने में उनकी टेक्सटाइल मील में साल भर से हड़ताल चल रही थी। ऐसे में एक नये सीइओ (मुख्य कार्य कारी अधिकारी) के लिए साक्षात्कार चल रहे थे। साक्षात्कार के दौरान् एक सज्जन कम्पनी के चेयरमेन को पसन्द आ गए। लेकिन वह हर तरीके से उसका परीक्षण लेना चाह रहे थे। इस बाबत् अधिकारी के बायो डेटा देखते हुए उन्होंने कहा, ‘‘जेन्टल मेन आप पूरी तरह से चयन के योग्य है। लेकिन थोड़ी सी समस्या है। हमने सुना है कि आपकी माँ वेश्या थी।’’
प्रार्थी अधिकारी एक बार तो सकपका गया। दो मिनट बाद धीरे से बोला, ‘‘श्रीमान् आप सही फर्माते है। लेकिन माँ के एक मात्र ग्राहक मेरे पिता ही थे।’’
इस पर चेयर मेन ने खड़े होकर माफी माँगी कि मुझे क्षमा करें। मैं आपके भावनात्मक गुणांक की परीक्षा ले रहा था। क्योंकि मेरी कम्पनी में हड़ताली कर्मचारी दिन-रात गाली-गलोज करते है। आप गुस्सा होकर मेरा नुकसान तो नहीं करेगें। इस हेतु इस हेतु मैंने उक्त परीक्षा ली है। आपका मेरी कम्पनी में स्वागत है। आप उनसे कुशलता पूर्वक निपट सकते हैं या नहीं, यह जाँचना जरुरी था। उक्त साक्षात्कार में चेयरमेन मात्र धैर्य की परीक्षा ले रहे थे। वे अपनी कम्पनी में छोटी सी बात से कर्मचारियों को भड़काना नहीं चाहते थे।
आजकल कम्पनियों को संतुलित सीइओ चाहिए है। मात्र तकनीकी ज्ञान व बौद्धिक क्षमता से कम्पनियाँ नहीं चलाई जा सकती है।

 Related Posts:

आत्म-विश्वास: हमारा भीतर ही हमारी प्राप्तियों के लिए जिम्मेदार है

सामाजिक विवाह (एरेन्ज मैरिज) करें या प्रेम विवाह? अंतिम भाग

नथैनियल ब्रैंडेन रचित विश्व प्रसिद्ध कृति ःअपना आत्म गौरव कैसे बढ़ाएँ

ऊँचे लक्ष्य बनाइये – फिर उनसे भी ऊँचे हो जाइये

मैंरे आदर्श एवं प्रेरणा स्रोत :डाॅ. स्टीफन हाॅकिंग

 

 

 

 

6 विचार “भावनाओं का महत्व:आई क्यू से बढ़कर ई क्यू होता है&rdquo पर;

  1. हारे थके मुसाफिर के चरणों को धोकर पी लेने से
    मैंने अक्सर यह देखा है मेरी थकन उतर जाती है ।
    कोई ठोकर लगी अचानक
    जब-जब चला सावधानी से
    पर बेहोशी में मंजिल तक
    जा पहुँचा हूँ आसानी से
    रोने वाले के अधरों पर अपनी मुरली धर देने से
    मैंने अक्सर यह देखा है, मेरी तृष्णा मर जाती है ।
    प्यासे अधरों के बिन परसे,
    पुण्य नहीं मिलता पानी को
    याचक का आशीष लिये बिन
    स्वर्ग नहीं मिलता दानी को
    खाली पात्र किसी का अपनी प्यास बुझा कर भर देने से
    मैंने अक्सर यह देखा है मेरी गागर भर जाती है ।
    लालच दिया मुक्ति का जिसने
    वह ईश्वर पूजना नहीं है
    बन कर वेदमंत्र-सा मुझको
    मंदिर में गूँजना नहीं है
    संकटग्रस्त किसी नाविक को निज पतवार थमा देने से
    मैंने अक्सर यह देखा है मेरी नौका तर जाती है ।

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s