सफलता पाने स्वयं को सही प्रश्न पूछें

व्याख्या जीवन बनाती है । व्याख्या एवं परिणाम, प्रश्नों पर आधारित होते हैं जो हम स्वयं से पूछते हैं। अर्थ, जिससे हम किसी घटना से स्वयं को जोड़ते हैं, हमारी मनोवृत्ति को तय करता है।

अपनी समस्या को जानें और उससे सम्बन्धित सही प्रश्न पूछें। आप उसका समाधान स्वयं ही पा लेंगे। कभी-कभी, निदान प्रश्न में ही निहित होता हैं। यह समस्या से दूर नहीं होता। हल, समस्या के दिल में छिपा होता हैं। प्रश्न, दिशासूचक यंत्र की भाँति होते हैं, जो हमें दिशा निर्देशित करते हैं। वे आपको जीने का उद्देश्य बताते हैं। वे जीवन में रस पैदा करते हैं।
कभी-कभी कुछ प्रश्नों में ‘क्यों’ हमें निर्बल बनाने वाला होता है। इन प्रश्नों के उत्तर आपको हतोत्साहित एवं निर्बल बनाते हैं। आपका मन बहुत शक्तिशाली होता है, अतः वह आपकी असफलता या समस्याओं के कारणों का पता लगा लेता है। इनमें से कई कारण बने रहते हैं और भविष्य की असफलताओं में हमें निर्दोष साबित करते रहते हैं। इस प्रकार असफलता के द्वेषपूर्ण दायरे बने रहते हैं। जब आप स्वयं से पूछते हैं कि मैं दुर्भाग्यशाली क्यों हूँ, क्यों ईश्वर मेरे विरूद्ध है या मेरे से नाराज हंैं, क्यों सारी दुनिया मेरे विरोध में हैं, तब आपकी संपूर्ण अनुभूति एवं व्यवहार आपकी सफलता के विरुद्ध होंगे। अतः आप स्वयं से ऐसे नकारात्मक प्रश्न नहीं पूछें। प्रश्न, भूतकाल से जुड़े हुए न हों। वे अच्छे कृत्यों से सम्बन्धित हों जो आप अब करने वाले हैं या भविष्य में करने वाले हैं।

 ( To be continued…)

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