सामाजिक विवाह (एरेन्ज मैरिज) करें या प्रेम विवाह?

जीवन में शादी का बहुत महत्व है। विश्व भर में, हर समाज में विवाह एक आवश्यक सामाजिक परम्परा है। जीवन की खुशियां जुड़ी हुई है। शादी हेतु सही साथी का चुनाव जरूरी है। सही साथी का चयन उसकी विधि से प्रत्यक्ष जुड़ा हुआ है। वैसे अपने आप में शादी की अपनी गुत्थी है। इसलिए सही साथी को होना सफलता हेतु आवश्यक है। वैसे सही साथी किसी भी विधि से मिल सकता है।यह रिश्ता शारीरिक, भावनात्मक एवं सामाजिक तीनों आयामों में व्याप्त होता हैं। इसकी सफलता कैरियर की सफलता से कम नहीं है। इसको भी एक बार स्वीकारने के बाद बदलना कठिन है। शादी एक बार कर लेने के बाद अलग होने पर व्यक्ति पर धब्बा लग जाता है। इस तरह को छोड़ने पर वह कुवाँरा नहीं तलाकशुदा ही जाता है।

प्रेम विवाह करने वाले व्यक्ति स्वयं निर्णय लेने वाले होते है। दोनों के व्यक्तित्व स्वतन्त्र चेतना युक्त होते है। अपना निर्णय करने के कारण थोड़े स्वाभिमानी व आधुनिक भी होते है। अतः वे एक स्तर से नीचे जाकर समझौता नहीं करते है। समाज का डर उनमें थोड़ा कम होता है। ऐसे लोग दूसरों की फिक्र कम ही करते है। वे अपनी जिम्मेदारी लेते है। अपना भला-बुरा समझते है। भावना के तल पर थोड़े विकसित भी हो सकते है। इसलिए  विवाद के अवसर आते है। अतः विपरित स्थिति होने पर अलग होने के निर्णय करने से भी घबराते नहीं है। इसलिए प्रेम विवाह में भी विच्छेद की संभावनाएँ रहती है।

परिवार द्वारा तय की गई शादी करने में ज्यादा समझदारी है, क्योंकि माता-पिता को शादी का अनुभव होता है। इस तरह की शादी को संस्कार शादी कह सकते है।एरेन्ज मैरिज की अवस्था मंे परिजन आपको शादी निभाने में साथ देते है। ऐरेन्ज मैरिज करने वालों के अचेतन मन में परिवार  व समाज का दबाव भी काम करता है। समाज भी इसे अच्छा मानता है व ऐसे विवाहों की सफलता चाहता है।

( To be continued)

8 विचार “सामाजिक विवाह (एरेन्ज मैरिज) करें या प्रेम विवाह?&rdquo पर;

  1. बड़े भाई!
    एक विवाह को सामाजिक स्वीकृति वाला प्रेम विवाह होना चाहिए जिस में दोनों पक्षों की शारीरिक संतुष्टि भी शामिल हो।

  2. You are really from Mars :).

    Love marriages fail because families make sure they don’t work, if they are successful then others will follow the suit. To prevent and disuade greater numbers of young people from disturbing the economic exchange inherent in the families; communities punish those who dare. Khap panchayats are one such gatekeepers.

    If you have doubt check these links:
    http://girlsguidetosurvival.wordpress.com/all-about-relationships/home-and-happiness/

    http://girlsguidetosurvival.wordpress.com/all-about-relationships/for-khamoshi-2/

    http://indianhomemaker.wordpress.com/2010/11/26/an-email-from-an-anonymous-confused-wife/

    http://indianhomemaker.wordpress.com/2011/03/04/are-happily-married-daughters-a-status-symbol-in-india/

    There are numerous others.

    Peace,
    Desi Girl

  3. अधिकांश भारतिया परिवार व माता पिता दहेज लेने व देने में हिचकिचाते नहीं हैं. इसी वजह आज महिलाओं को बहुत परेशानिया झेलनी पड़ रहीं हैं. माता पिता अक्सर लड़कियों की खुशियों से अधिक अपने पड़ोसियों व बिरादरी की फ़िजूल बातों की फिकर करते हैं. एक बार शादी हो जाने पर यदि लड़की को परेशानी भी हो तो उस पर दबाव डाला जाता है, खर्चे व बदनामी का वास्ता दिया जाता है, आए दिन लड़कियों के ख़ुदकुशी करने की खबर अख़बार में आती है, या कई बार जला के मार दी जाती है.
    समाज समझता है की यदि तलाक़ नहीं हुआ तो सब ठीक है, लेकिन अगर बेमेल शादी में दोनो दुखी हो तो ऐसी शादी का क्या मतलब? यह कहना की समाज के दबाव से शादियाँ बनी रहती हैं, शायद सही नही है, शादिया समाज के डर से नहीं स्वयं एक बालिग व समझदार दंपति की इच्छा से बनी रहनी चाहिए. एक चिंता की बात यह भी है की समाज का दबाव अधिकतर लड़की के उपर ज़्यादा रहता है, इसीलिए चाहे मार जाएँ पर वापस घर नहीं आ पातीं.
    सही तो यह होगा की हर नागरिक, शादी को अपने जीवन आ एक हिस्सा समझे, अपना जीवन नहीं. शादी जीवन के लिए है, जीवन शादी के लिए नहीं.
    हर व्यक्ति को अपना जीवनसाथी चुनने की समझदारी देना मा-बाप व समाज का कर्तव्य है.
    यदि हमारी सोच नहीं बदलती तो शादी व दहेज की चिंता में मा-बाप भ्रूण (female-foeticide) हत्या करते रहेंगे.

  4. upar likhi gai bate adarsh ke dharatal par sahi hai , parantu yadi kisi ladki ka mayaka pacha hi usko sahi galat ke bare me na bataye to asi arrange marrage se to love marraige hi behtar hai kam se kam is bat ka dukh to nahi rahta hai ki arrange marriage kari hai aur sath hi ghar vale jo ki is nasamjhi me alag pareshan hote hai vo bhi nahi hote hai . iske alawa aaj kal to kanun to itna jayada berahm ho gaya hai ki agar patni ne thodi bhi jhuti shikayat kar di to mata-pita se lekar pura parivar thane me aa jata hai aur tub samaj bhi nahi kada hota hai.

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s