शिवरात्रि कैसे मनाएँ?

आज महाfशवरात्रि है। त्यौहार हमें जगाने के लिए आते है। अपने भीतर स्थित स्वयं को,ष्शिव को जानने का महापर्व है महाशिवरात्रि। शिवरात्रि को शिव पार्वती के विवाह की रात्रि भी माना जाता है। दार्शनिक इसे पुरुष एवं प्रकृति के मिलन की रात्रि मान कर इस दिवस को सृष्टि का प्रारंभ मानते हैं। इसे आसुरी शक्तियों पर विजय प्राप्त करने के लिए शिव एवं शक्ति का योग भी कहा गया है। भगवानfश व का जन्म आज ही के दिन हुआ था। किसी का भी जन्म दिन क्यों महत्वपूर्ण है? शिव आदि भगवान है। जो हिमालय में निवास करते है।fशव का प्रतीक लिंग है तो पार्वती का प्रतीक योनि है। fशव पुरुष है तो पार्वती प्रकृति है, fशव चेतना है तो पार्वती पदार्थ है। ये दोनों प्रजनन विज्ञान  के प्रतीक है। पुरुष और प्रकृति मिलकर सृष्टि का निर्माण करते है। शिव की जीवनी से हम बहुत सी चीजें सीख सकते है।

मात्र उपवास करने से fशवजी नहीं मिल सकते है। मात्र रुद्र-पाठ से fशवजी नहीं मिल सकते है। भंग पीने से fशव की आराधना नहीं हो सकती है। पैदल चलकर मन्दिर जाने से fशवजी नहीं मिलते है। कोरी कथा सुनने से fशव के गुण नहीं पैदा हो सकते है। मात्र अभिषेक से कल्याण नहीं होने वाला है।इस दिन का उपयोग हमें अपने को पहचानने में लगाना चाहिए। किसी कर्मकाण्ड में डूबकर इस दिन को नहीं खोना चाहिए।

शिवरात्रि पर सच्चा उपवास यही है कि हम परमात्मा शिव से बुद्घि योग लगाकर उनके समीप रहे। उपवास का अर्थ ही है उपवास अर्थात समीप रहना। जागरण का सच्च अर्थ भी काम, क्रोध आदि पांच विकारों के वशीभूत होकर अज्ञान से स्वयं को सदा बचाए रखना है। मन, बुद्धि, चित्त, अहंकार, पाँचों ज्ञानेंद्रियों और पाँचों कर्मेंद्रियों पर विजय प्राप्त  करना ही शिवरात्रि व्रत करना है। शिवरात्रि के पर्व पर जागरण का महत्व है। तो आइए, हम सब इस आध्यात्मिक महत्व को जानकर सजग  बनें  ।

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4 विचार “शिवरात्रि कैसे मनाएँ?&rdquo पर;

  1. अति सुन्दर प्रस्तुति है मन को छु लिया । वैसे तो आपका ब्लॉग डेली ही पढ़ लेता हूँ ।आपका बुक भी डाउनलोड करके पढ़ा कुछ दिनों से परेशां हूँ आपके ब्लॉग से उर्जा मिलती है इसलिए पढ़ लेता हूँ । सायद आपको पता भी नहीं होगा की आपके लेख से कोई जिन्दगी जीना सिख रहा है । लिखना बहुत चाहता हूँ पड़ अभी नहीं जब कुछ बन जाऊंगा तब आपसे जरुर संपर्क करूँगा क्यूंकि मेरी सफलता मैं आपका भी हाथ होगा क्यूनी मैं तो नवम्बर से परेशां था और जीवन से निराश हो गया था । मैं जिन्दा क्योँ हूँ यही सोचता रहता था पर आपके ब्लॉग से नयी उम्मीद जगी है मैं कुछ न कुछ अच्छा जरूर कर लूँगा॥ आपने पर्व त्यौहार को भी जीवन से जोड़ दिया । इतना तो मैं सोच भी नहीं पता था ।
    उम्मीद है आप यों ही लिखते रहें क्यूंकि मेरे जैसे लोग इस्ससे बहुत कुछ सीखते है॥ इस्श्वर आपको अच्छा स्वास्थ और रचनातमक दृष्टि दे और आप यूं ही लिखते रहें॥ —:बासुकी नाथ :—

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