भावी जीवन साथी में कोनसे गुण होने चाहिए ? भाग -२

गतांक में  आप   समायोजन की क्षमता  एवं         समझदारी
के बारे में पढ़  चुके है,   शेष …..।
3. अन्तर्मन, अन्र्तदृष्टि, आन्तरिक क्षमता

व्यक्ति आन्तरिक क्षमता से ही बाह्य आचरण करता है। हम अपने भीतर के आधार पर ही चलते है। अन्र्तदृष्टि सम्पन्न होने पर ही हम दूसरों को बेहतर समझ सकते है। जीवन में सफलता हेतु आन्तरिक क्षमता जरुरी है। इसी से व्यक्ति आगे बढ़ता है। बाह्य क्षमता के सारे प्रर्दशन खोखले है। दृष्टि से सृष्टि बनती है। अतः जीवन में दृष्टिकोण का बड़ा महत्व है। अतः साथी के अन्तर्मन को समझे कि उसके आन्तरिक विश्वास कैसे हैं? ब्राह्य आचरण के आधार में जाएं। वह आन्तरिक रूप से कैसा हैं? व्यक्ति के अन्तर मन से उसकी दृष्टि बनती है, उसी से उसकी क्षमता बनती है। अन्दर के गुणों का परखना बहुत जरूरी है। ‘‘अन्दर के गुण भगवान जाने’’ मान कर न चलें। इनका परीक्षण बहुत आवश्यक है। इनको जानने के लिए ही घण्टे भर की मूलाकात काफी नहीं है। प्रत्येक घर के सदस्य को अक्सर निकाल कर अकेले में चर्चा करना चाहिए। साथी से उसकी आदतें व मूल्य जानने उसके जीवन की घटनाएँ जाने। किस परिस्थिति में कैसे प्रतिक्रिया करता है? उसका झगड़ा किससे है, वह कब उलझा है, उसकी दुश्मनी किस-किस से है। विपरित स्थिति में वह क्या प्रतिक्रिया करता है? आदि की समझ साथी के चुनाव करते वक्त जरूरी है। ‘लीव टूगेदर’ का प्रचलन परखने हेतु है वहाँ तक उचित है।

4.  खानदान/परिवार

व्यक्ति अपने संस्कार परिवार से सीखता है एवं फ्रायड के अनुसार हम सात वर्ष तक ही अमुमन सीखते है। अतः हम सब अपने परिवार के संस्कारों से बंधे होते है। एवं उन्हें ही सही मानकर जीते है। अतः अलग संस्कार होने पर साथ निभाना कठिन होता है। इसीलिए पाटर्नर के परिवार को देखना जरुरी है। अगले के परिवार का चरित्र व इतिहास जरुर पता करें। पत्नी के चुनाव में उसकी माँ का व्यवहार व करनी जरूर ध्यान में रखें। कुछ गुण वंशानुगत होते है अतः उसके परिवार का चाल-चलन व पूर्व इतिहास ज्ञात करें। परिवार के घमन्डी होने पर जरूरी नहीं है कि सभी सदस्य घमन्डी, फिर भी संभावना रहती है कि घमन्डी हो। अतः इस पहलू की विशेष जांच कर लें। अपवाद का भी नियम है। परिवार की प्रतिष्ठा साफ-सुथरी हो तो अन्यथा होने की गुजाइश कम रहती है।

5. शिक्षा

जीवन में  शिक्षा का बहुत महत्व  है। शिक्षा से जीवन में बहुत से आयाम खुलते है। पाटर्नर दूसरे साथी की  शिक्षा के अनुसार शिक्षित होना चाहिए। इन्जीनियर पति होने पर पत्नी का इन्जीनियर होना जरुरी नहीं है। लेकिन स्कूली शिक्षा कम से कम समान स्तर की हो । साथी का आई क्यू भी उत्तम होना चाहिए। वैसे ही यह मसला व्यक्तिगत अधिक है।

( To be continued…)

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