आन्तरिक मुस्कान कैसे बढ़ाए: ओशो की विधि

जब भी आप खाली बैठे हो और कुछ करने को न हो तो, अपने नीचे के जबडे़ को शिथिल कर ले और मुंह को हल्का सा खोल ले। मुंह से श्वास लेना शुरू करें, लेकिन बहुत गहरी नही। शरीर को ही श्वास लेने दे ताकि श्वास उथली ही रहे। और वह और और उथली हो जावेगी। और जब आप देखेंगें कि श्वास काफी उथली हो गई है और मुुुह खुला हुआ है और आपका जबडा शिथिल है, तो आपका पुरा शरीर बहुत विश्रामपूर्ण अनुभव करेंगा। उस क्षण में एक मुस्कान उठती महसूंस करे-चेहरे पर ही नही बल्कि अपने पूरे प्राणों पर। और आपको बराबर अनुभव होगा। यह ऐसाी मुस्कान नही है जो होठों पर आती है-यह अस्तित्वगत मुस्कान है, जो भीतर-भीतर फैलती है।

Smile Please

इसको करने से ही ख्याल आऐगा कि यह क्या हे? क्योंकि इसे समझाया नही जा सकता। चेहरे पर होठो से मुस्कुराने की कोई जरूरत नही है, बल्कि ऐसे जैसे कि आप पेट से मुस्कुरा रहे हो। जैसे पेट से मुस्कान उठ रही हो। और यह एक मुस्कान है।

हंसी नही इसलिये यह बहुत ही कोमल और नाजुक है-जैसे कि एक गुलाब का फूल पेट में खिला हो और उसकी सुगंध पूरे शरीर पर फैल रही हो। एक बार आपकेा ख्याल आ जाएगा कि यह मुस्कान क्या है? तो आप चैबीस घंटें आनन्दित रह सकते है। और जब भी आपको लगे कि वह आनन्द खो रहा है बस आंखें बन्द करें और उस मुस्कान को फिर से अनुभव में ले ले। और वह वहाॅ होगी। और दिन में जितनी बार भी आप चाहे उस मुस्कान का आनन्द ले सकते है। वह सदा ही वहाॅ मौजूद है।

Related Posts:

हास्य चिकित्सा असाध्य रोगों में भी उपादेय

स्थायी प्रसन्नता की कुंजी क्या है

सफल होने मानसिक थकान/तनाव केैसे मिटाएं?

हाँ! मैं पागल हूँ! डाॅक्टर का इलाज करता हूँ

क्षमा कर अवचेतन के तनाव से मुक्त हो

धन्यवाद केैसे देना कि वह उन तक पहुँचे? भाग-दो

 

2 विचार “आन्तरिक मुस्कान कैसे बढ़ाए: ओशो की विधि&rdquo पर;

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s