हँसकर दर्द को भगाए और रोग – प्रतिरोध शक्ति बढ़ाएं

दुनिया में प्रसन्नता नामक औषधि का कोई विकल्प नहीं है, क्योंकि इसके अनुपात मंे ही शेष दवाइयां काम करती है। हँसी मन की गाँठे खोलती है। प्रसन्नता से मतलब केवल शारीरिक हास्य से नहीं है। भीतरी पवित्रता से उबरने वाला प्रसन्न भाव चाहिए। ऐसे मन की अवस्था मंे न भय होता है न शिकायत और न विरोध।रोगी को हास्यरस प्रधान कविताएं सुनाकर जो चिकित्सा करने की विधि चली, उसका उद्देश्य भी यही सकारात्मक विचारों के लायक विद्युत् प्रवाह को पैदा करना था। अतः इस बात पर विश्वास पैदा करें कि प्रसन्नता एक देवता है, कल्पवृक्ष है, जो मनोवांछित फल प्रदान करती है। तभी तो जोश बिलिंग्स ने लिखा है कि औषधि मंे कोई आमोद-प्रमोद नहीं है, लेकिन आमोद-प्रमोद में औषधि खूब भरी हुई है।अब तो वैज्ञानिक ढंग से यह प्रमाणित हो गया है कि मानव शरीर स्वयं ही दर्द निवारक एवं तनाव को कम करने वाले हारमोन्स पैदा करता है। हंसने से इण्डोरफिन नामक हारमोन सक्रिय होता है जो एक प्रभावशाली पेन किलर है। न्यू जर्सी के ओस्टियोपैथिक मेडिसिन स्कूल के डाॅक्टर मार्विन ई. हैरिंग का कहना है कि ’’एक दिल खोलकर अट्टाहास करना, मध्य पटल, वक्ष, पेट, हृदय, फैफडों और जिगर तक की मालिश कर देता है। जैसे कोई अन्दर ही दौड लिया हो।’’ मुम्बई के लाफ्टर क्लब के संस्थापक डाॅक्टर मदन कटारिया कहते हंै – ’’जोरदार हंसी आपके फैफडों से बची हुई वायु को निकाल देती है, और उसे ज्यादा आक्सीजन वाली ताजा वायु से भर देती है।’’ उन्मुक्त हंसी तनाव को समाप्त कर देती है। आधुनिक शोधों से यह भी प्रमाणित हुआ है कि शरीर में किसी भी प्रकार की सूजन हंसने से घटती है, एवं हंसने से रक्तचाप भी घटता है।

हँसी खुशी को आकर्षित करती है, नकारात्मकता को नष्ट करती है और चमत्कारिक इलाज की ओर ले जाती है। हमें अपने उपचार में हँसी को शामिल करना चाहिए जैसा कि डाॅ. नाॅर्मन क़जिन्स की कहानी से हमें ज्ञात होता है।नाॅर्मन कुजिन्स को एक असाध्य बीमारी थी। डाॅक्टरों ने उसे बताया कि वह सिर्फ कुछ महीनों का मेहमान है। नाॅर्मन ने अपना इलाज ख़ुद करने का फैसला किया। तीन महीनों तक उसने सिर्फ़ फ़िल्में देखीं और वह हँसता रहा, हँसता रहा, हँसता रहा। उन तीन महीनों के भीतर बीमारी उसके शरीर से चली गई। डाॅक्टरों ने उसके उपचार को चमत्कार की संज्ञा दी। पेट में बल पड़े  उतना दस मिनट तक हँसने पर दो घंटे का दर्द चला जाता है।

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5 विचार “हँसकर दर्द को भगाए और रोग – प्रतिरोध शक्ति बढ़ाएं&rdquo पर;

  1. 1- हर वक्त, हर स्थिति में मुस्कराते रहिये, निर्भय रहिये, कर्त्तव्य करते रहिये और प्रसन्न रहिये ।
    2- अवसाद से बचने की सर्वश्रेष्ठ औषधि हैं-हर समय प्रसन्न रहिये।
    3- हर सुबह की शुरूआत प्रसन्न मन के साथ कीजिये। आपका पूरा दिन उत्साह और ऊर्जा से भरा रहेगा।

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