आत्म-विश्वास, सफलता और विवेकानन्द

आत्म-विश्वास, सफलता और विवेकानन्द के अनमोल वचन

  • जिसमें आत्म-विश्वास नहीं है, उसमें अन्य चीजों के प्रति विश्वास कैसे उत्पन्न हो सकता है?
  • कमजोरी का इलाज कमजोरी की चिन्ता करना नहीं, बल्कि शक्ति का विचार करना है। कमजोरी कभी न हटने वाला बोझ और यंत्रणा है, कमजोरी ही मृत्यु है।
  • पुराने धर्म ने उसे नास्तिक कहते थे जो ईश्वर मंे विश्वास नहीं करता था, किन्तु नया धर्म उसे नास्तिक कहता है, जिसे स्वयं पर विश्वास नहीं है।
  • मन की दुर्बलता से अधिक भंयकर पाप और कोई नहीं है।
  • मृत अतीत को दफना दो। अनन्त भविष्य तुम्हारे  सामने है ओैर स्मरण रखो कि प्रत्येक शब्द, विचार और कृति तुम्हारे भाग्य का निर्माण करता है।
  • कोई भी कार्य करना कठिन नहीं होता, सिर्फ उसे साधने के लिए कठोर परिश्रम की आवश्यकता होती है। मेहनत द्वारा किसी भी कार्य मंे  सफलता पाई जा सकती है।
  • गीता का पाठ करने की अपेक्षा व्यायाम करने से तुम स्वर्ग के अधिक समीप पहुँच सकोगे।यह संसार एक व्यायामशाला है जहाँ हम अपने-आपको बलवान बनाने के लिए आते हैं।


7 विचार “आत्म-विश्वास, सफलता और विवेकानन्द&rdquo पर;

  1. समय होगा मुटठी में :

    – जहां तक हो समय सीमा निर्धारित करें।
    -नाकामी का रोना रोने के बजाय गलतियों से सबक लेना सीखें।
    -समय की बर्बादी से बचें। प्रत्येक क्षण कीमती है।
    -समय पर काम पूरा करने के बाद खुद को शाबाशी दें।

    इनका भी रखें ध्यान:

    -रूकावटों से बचें यानी फिजूल की फोनवार्ता या अनापेक्षित आगंतुक ।
    -दूसरों को दिये गये कामों में दखलंदाजी न करें।
    -अनिर्णय और काम की टालमटोल से परहेज करें।
    -बिना योजना के काम शुरू न करें।
    – तनाव या थकावट को खुद पर हावी होने न दें।
    -कभी कभार ” न ” कहना भी सीखें।
    -व्यक्तिगत स्तर पर अव्यवस्थित न रहें।

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