ब्लॉग लेखन में अनुच्छेदों( paragraphs) को कैसे जोड़ना

लेखन में धारा प्रवाहिकता जरूरी है। इस तरह लिखें कि पाठक की जिज्ञासा निरन्तर आगे पढ़ने की बनी रहे। उसे सन्तोष नहीं मिलना चाहिए। आगे पढ़ने की जिज्ञासा बनी रहें, प्यास बनी रहे। ऐसा लेखन होना चाहिए। सरस, सरल व सम्बन्धित बात धीरे-धीरे आगे बढ़े तो पाठक का  पढ़ने का रस बना रहता है।पाठक लेखों में निरन्तरता पसन्द करता है। पाठक इतना तेजी से आगे नहीं बढ़ पाता है जितने लेखक लिखता है। अर्थात् कुछ लूप्त कड़ी प्रतीत होती है। लेखन में अनुच्छेंद एक दूसरे से जुड़ें हुए नहीं है। उनमें निरन्तरता नहीं है।

आप एकदम छलांग ले लेते है। ऐसे लगता है जैसे असंगत रूप से आगे बढ़ रहे है। जबकि सारे अनुच्छेंद एक-दूसरे में माला के मोती की तरह पिरोयें हुए होने चाहिए। अनुच्छेंद में एक बात पूरी स्प्ष्ट होनी चाहिए। दूसरा आयाम आते ही नया अनुच्छेंद लिखना चाहिए। कई लेखों में विषय वस्तु सम्बन्धित तो होती है लेकिन कुछ-कुछ अस्पष्ट लगता है कि जेैसे कुछ छुट गया है। कई बार नया आयाम  बिना भूमिका के ही आ जाता है। इस तरह की छलांग पाठक को चुभती है। पाठक लेखों में निरन्तरता पसन्द करता है। पाठक इतना तेजी से आगे नहीं बढ़ पाता है जितने लेखक लिखता है। अर्थात् कुछ लूप्त कड़ी प्रतीत होती है।इस कड़ी को स्थापित करते ही पाठक जुड़ जाता है। वह लेखन के साथ-साथ चल पाता है।

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