विश्वास स्वस्थ बनाने मंे दवाइयों से ज्यादा प्रभावशाली : सच्ची घटना

सकारात्मकता से चमत्कार

बर्नी सीगल ने अपनी पुस्तक लव, मेडिसन एंड मिराकल øप्रेम, दवा और चमत्कार} मंे एक अध्याय‘‘ स्वस्थ होने की साझेदारी’’ पर लिखा है। उन्होंने जो उदाहरण उद्धत किए हैं, उनमें एक राइट नाम के मरीज का है। कोई इलाज कारगर नहीं हो रहा था और नारंगी के आकार की गांठेे उनके गले, बगलों, जांघों, सीने और पेट में थीं राइट को आशा थी कि क्रेब्योजेन नामक एक नई दवा का, जिसका मूल्यांकन हो रहा था, परीक्षण उस पर किया जाएगा। वह दी गई। गांठें जिन पर तब रेडियोथैरेपी का भी असर नहीं हो रहा था,‘‘बर्फ के गोले की तरह’’ पिघल गईं। बहुत ही प्रसन्नचित होकर वह अपने पसंद के शौक- अपने खुद के विमान को चलाने को पूरा करने चल दिया।

दो माह के अंदर क्रेब्योजेन के बारे में परस्पर-विरोधी समाचार आए। वह अपनी आखिरी उम्मीद से भी हाथ धोने लगा और फिर पहले वाली विषादपूर्ण स्थिति मंे लौट आया। राइट के डाॅक्टर, ब्रूनो क्लोप्फेर, ने उसे बताया कि पुरानी जानकारियां दवा के उस भंडार से संबंधित थीं जो खराब हो चुका था, और उसका इलाज नई‘‘अति परिष्कृत’’ दवा से किया जायेगा। खूब धूमधाम के डाॅक्टरों ने उसे सिर्फ सादा पानी का इंजेक्शन लगाया। परिणाम बिल्कुल अविश्वसनीय रहा। गांठे फिर पिघल गई और वह फिर विमान उड़ाने लायक स्वस्थ हो गया। तब उसने अमरीकी मेडिकल ऐसोसिशन के इस अधिकृत फैसले को पढ़ाः‘‘राष्ट्रव्यापी परीक्षण दिखाते हैं कि कैंसर के इलाज में क्रेब्योजेन कोई उपयोगी दवा नहीं है।’’ कुछ दिन के अंदर राइट को फिर हाॅस्पिटल मंे दाखिल कराया गया और दो दिन बाद वह मर गया। यह उदाहरण दिखाता है कि कभी-कभी विश्वास स्वस्थ बनाने मंे दवाइयों से ज्यादा प्रभावशाली होता है।

8 विचार “विश्वास स्वस्थ बनाने मंे दवाइयों से ज्यादा प्रभावशाली : सच्ची घटना&rdquo पर;

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