स्थायी प्रसन्नता की कुंजी क्या है?

दीपक चोपड़ा  के अनुसार

  • प्रसन्नता ही सभी लक्ष्यों का परम लक्ष्य है और यह चेतनता की वह अवस्था है, जो आपके भीतर पहले से मोैजूद है।
  • किसी कारण से मिली खुशी दुःख का ही एक रुप है, क्योंकि वह कारण आपसे कभी भी छिन सकता है। अकारण खुश होना मायने मंे वह खुशी है, जिसका अनुभव आप सभी करना चाहते हैं।
  • जब आपका जीवन आपके भीतरी आनंद की अभिव्यक्ति बन जाता है, तब आप खुद को इस ब्रह्यांड की रचनात्मक ऊर्जा के साथ एकाकार महसूस करते हैं और एक बार यह सिलसिला बन जाए, तो आपको महसूस होता है कि आप वह सब कुछ हासिल कर सकते हैं, जो आप पाना चाहते हैं।
  • स्थायी सुख की कुंजी है अपने स्रोत, अपनी अंतर्रात्मा के अपरिवर्तनीय सारतत्त्व के साथ तादात्म्य स्थापित करना। उसके बाद आप सुख की तलाश नहीं करते, क्योंकि यह आपके भीतर ही है।
  • सकारात्मक मन से ज्यादा महत्त्वपूर्ण है शांत मन होना। शांत मन निर्णय, विश्लेषण ओैर व्याख्या की सीमा से परे होता है।
  • जब आप जीवन के सारे वैषम्य स्वीकार कर लेते हैं, तो आप सुख और दुःख के किनारों के बीच, बिना किसी एक से चिपटे, सहजता से तैर सकते हैं। यह असली स्वाधीनता की प्राप्ति है।

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