सिर्फ व्यक्तिगत कमजोरी के आधार पर किसी को दोष देना ठीक नहीं

यदि किसी के व्यक्तिगत जीवन में कोई कमजोरी है, या कुछ गड़बड़ है इसलिए उससे दूर न जाएं । व्यक्तिगत कमजोरी किसमें नहीं होती है। अपनी कमजोरी को व्यक्ति स्वयं भी पसन्द नहीं करता है। इसलिए उसकी कमजोरी को अनदेखी करें व व्यक्तिगत विशेषताओं को देखें। बहुत घनिष्ठता भले ही न बढ़ाएं लेकिल व्यवहार जरुर रखें। सम्बन्धों का आधार अच्छाईयाँ होना चाहिए। ज्यादा मीन मेख अहंकार खोजता है उससे बचें।
हमें किसी का मूल्यांकन उसकी कमजोरी के आधार पर नहीं बल्कि उसकी विशेषताओं के आधार पर करों। हमें मोती चुनने चाहिए। जीवन अच्छाई-बुराईं के मेल से बनता है। किसी में भी सारी अच्छाईयाँ या सारी बुराईयाँ नहीं हो सकती है। किसी की चारित्रीक कमजोरी उसकी अपनी समस्या है। यदि वह अच्छा प्रशिक्षक है तो उससे प्रशिक्षण लेने में ऐतराज न होना चाहिए। आपका मतलब अपने प्रशिक्षण से रखो। तभी मेरे मित्र गिरधारीजी इस तरह भेद कर व्यक्ति से परहेज नहीं रखते है। तभी तो गांधीजी ने कहाँ था कि घृणा पाप से करों पापी से नहीं। यह अच्छी बात मुझे सिखनी है।
यदि आपको कोई आपकी कमजोरी के कारण सम्बन्ध न रखें तो आपको कैसा लगेगा? आपमंे ही नहीं सबमंे कुछ न कुछ अच्छाईयाँ होती है।अच्छाईयाँ देखें।
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