आर एम लाला की कृति कैंसर पर विजय

एक सफल रोगी की आप बीती
कैंसर पर विजय पाने की यह आत्मगाथा बहुत रोचक एवं उपयोगी है।साथी रोगी का मनोबल बढ़ाने के लिए उसके साथ की गई वार्ता से शुरु होती है।यह किताब बताती है कि मात्र दवाई से रोगी ठीक नहीं हो सकता है। ठीक होने के लिए रोगी का मनोबल,ठीक होने की जिजीविशा, अस्तित्व के प्रति आस्था और सकारात्मक होने की जरुरत है। कैंसर का मुकाबला करने की विधि ,दृष्टि एवं उदाहरण दिए गए है।। इस पर विस्तृत जीवन्त एवं अनुभव युक्त वर्णन उपलब्ध है। क्योकि लेखक स्वयं कैंसर का मरीज रह चुका है।
इस पुस्तक में कैंसर की प्रकृति, उसके कारण, इलाज और स्वास्थय लाभ का विस्तृत वर्णन है। डाॅक्टर एस एच आॅडवानी प्रसिद्ध कैंसर विशेषज्ञ ,टाटा हाॅस्पिटल ने इसकी भूमिका मंे लिखा है कि यह पुस्तक मरीजों को कैंसर ओैर उसके इलाज मंे सामने आने वाली शारीरिक, मनोवैज्ञानिक और भावनात्मक समस्याओं को समझने, स्वीकार करने ओैर झेलने मंे मदद मिलती है। प्रत्येक कैंसर के रोगी को उसे पढ़नी चाहिए।
इंडिया टुडे में नंदिता चैधरी ने लिखा है कि आर. एम. लाला का यह सबसे ह्नदयस्पर्शी प्रयास है। यह एक साध्य है कि केैसे कैंसर किसी व्यक्ति के शरीर पर हमला कर सकता है। लेकिन कभी उसकी आत्मा पर विजय प्राप्त नहीं कर सकता।
यह पुस्तक सेलिब्रसन आॅफ द सेल्स(कोशिकाओं का महोत्सव) का हिन्दी अनुवाद है। लेखक जे आर डी टाटा के अधिकृत जीवनी कार है।

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