लक्ष्य प्राप्ति में बाधा आसक्ति की हैः आसक्ति ने अवचेतन की दिशा बदल दी जिसने मुझे आई ए एस नहीं बनने दिया

मैं जवाहरलाल नेहरु विश्व विद्यालय मंे रहकर तीन वर्ष तक आई ए एस की तैयारी करता रहा।समय पर परीक्षा भी दी लेकिन सफलता नहीं मिली। आज इतने अनुभव के बाद उसका एक कारण समझ में आता है। अत्यधिक आसक्ति के कारण परीक्षा की तैयारी के बजाय मेरा अवचेतन मन भय, आंशका, चिंता  में लगा रहता था। जिस कारण मेरे सोच  बदल गई।मेरेअवचेतन मेंपरीक्षा के उत्साह -अवसर की खुषी की बजाय,डर-आषंका घुस गए। इस तरह मेरी उर्जा का  फोकस नकारात्मक हो गया ।
परीक्षा की तैयारी के बजाय मैं परीक्षा के भय से घबराने लगा। आशंका के कारण  बार-बार सोचता कि आई ए एस में चयन नहीं हुआ तो मेरा क्या होगा। क्योंकि मेैं  आगे की काॅलेज की पढ़ाई में ध्यान नहीं दे रहा थ। प्रतियोगी परीक्षा में सफल होना मेरे लिए जरुरी था। मात्र इस डर से कि मेरा चयन नहीं होगा तो मेरे भविष्य का क्या होगा। इस तरह के विचार मुझे पढ़ने नहीं देते। आत्म विश्वास ऐसे में निरन्तर कम होता गया  और मंै तनाव ग्रस्त रहने लगा। तैयारी के बजाय मेरा फोकस चिंता हो गया। जबकि उस समय मुझे अपना  सारा ध्यान परीक्षा पर केन्द्रित करना था। फोकस बदलने से मेरी ऊर्जा बंट गई। ऐसे में बिना फल की ईच्छा के कर्म करने का महत्व समझ मंे आता है क्यों कृष्ण ने अर्जुन को निष्काम कर्म का उपदेश दिया था, समझ मंे आता है। तब मेरा ध्यान परिणाम के प्रति न होकर तैयारी (कर्म) पर होता तो परिणाम स्वतः ही दूसरा हो सकता था।
कामनाओं की पूर्ति के लिए अपनी शक्तियों का प्रभावी प्रयोग करना हो तो हमें परिणाम से आसक्ति को त्यागना होगा। इसका मतलब यह नहीं है कि हम लक्ष्य न बनायें या परिणाम की परवाह न करें। हमें फल चाहिए लेकिन इसमें बुरी तरह आसक्त  होकर अपने अवचेतन की दिषा न बदले ।अपना काम भूल कर परिणाम के ही चारों तरफ सोचते रहे।कर्म पर फोकस कर अवचेतन को अपने पक्ष में रखे । आसक्ति एक प्रकार का भय, संशय और चिंता है और इससे प्राकृतिक मेधा के प्रवाह में बाधा आती है। ऐसे मंे कामना पूरी नहीं होती है।
जितना ही हम अनासक्त होकर कर्म करेगें उतनी ही हमारी क्षमता स्वतः स्फूर्त ढंग से बढ़ती जाती है। अवचेतन से उर्जा  मिलती है जिसे कहते है कि  सारा अस्तित्व ईच्छा पूर्ति में सहयोग करता है। एल्केमिस्ट नामक उपन्यास में जैसा कि लिखा है हमारी कामना पूरी करना प्रकृति के अधीन होता है।

Related Posts:

14 वर्षीय लड़की जाँन आॅफ आर्क ने अवचेतन मन को विकसित कर फौज का नेतृत्व किया

कैसे अवचेतन मस्तिष्क ने मुझे सहयोग किया

अवचेतन मन क्या है एवं इसका उपयोग कैसे करे

अवचेतन मन की शक्ति: एक व्यक्ति साइकिल क्यों नहीं सीख पाता

How to Use the The Power of Subconscious Mind through Prayer

4 विचार “लक्ष्य प्राप्ति में बाधा आसक्ति की हैः आसक्ति ने अवचेतन की दिशा बदल दी जिसने मुझे आई ए एस नहीं बनने दिया&rdquo पर;

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s