हाँ! मैं पागल हूँ! डाॅक्टर का इलाज करता हूँ

जब मैं 32 वर्ष पूर्व हुई शादी के लिए जिम्मेदार व्यक्ति, व्यवस्था व स्वयं को दोष देता हूँ तब पागल हूँ। अतीत में घटी दुर्घटना को याद करने का पागलपन है क्योंकि जब उसको बदला नहीं जा सकता तो याद करने का क्या अर्थ है। जिस घटना को अब बदला नहीं जा सकता उसके लिए चर्चा करता हूँ यह एक तरह की निरी मूर्खता है । इस चर्चा से स्वयं भी आहत होता हूँ व अपनो को भी आहत करता हूँ। इससे आता-जाता कुछ नहीं लेकिन चर्चा सबको घायल करती है। ये घायल होने व करने का पागलपन मुझ में आज तक विद्यमान है। मेरे अहंकार को पड़ी चोट में आज तक भुला नहीं हूँ। अपने घाव में अंगुली डाल कर उसे रोज कुरेदना मेरा शगल हो गया है।
मेरे भीतर पछताने का पागलपन मौजुद है।तब मैं कमजोर था। मुझे ऐसे  लोगों को दण्डित करना चाहिए जिन्होंने मेरा जबरन ब्याह कराया, वरना मेरा जीना बेकार है। इस तरह की बातें पागल ही कर सकता है क्योंकि दूसरों को सजा देने से मेरी शादी आज निरस्त नहीं होनी है। फिर भी यह बरकरार है। जो बदला नहीं जा सकता उसके लिए रोता हूँ। जो हाथ में हो उसको स्वीकार नहीं करता हूँ एवं अतीत मंे जीता हूँ।
मेरी शादी कराने वाले जीत गये। उनकी जीत मुझे पचती नहीं है। यह सत्य से मुंह मोड़ना है। हो चुका जिसे अस्वीकारना मेरा सनकीपन है। जिसे बदला नहीं जा सकता मेरा उस पर रोना-पीटना व्यर्थ है। भविष्य को बनाया जा सकता है, उस पर ध्यान देने की बजाय अतीत पर पछताने में समय खोना पागलपन ही है। होनी की स्वीकार में समझदारी है यह बात मेंै याद नहीं रख पाता हूँ।
एक स्वस्थ व्यक्ति कभी भी अतीत में बेमतलब नहीं जीता है। स्वयं को दुःखी करने का कोई अवसर मैं नहीं खोता हूँ। हर कहीं हर जगह शादी की चर्चा लाकर मैं दुःखी ओरो को करता हूँ व स्वयं दुःखी हो जाता हूँ। अपने घर को नरक बनाने का प्रयत्न सदैव इसी तरह करता हूँ। हां मैं इस तरह इतना तो पागल हूँ।
( To be continued…)

4 विचार “हाँ! मैं पागल हूँ! डाॅक्टर का इलाज करता हूँ&rdquo पर;

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