हम शरीर के पार है ,फिर भी शरीर हमारा प्रथम व श्रेष्ठतम मित्र है

हमारा पृथ्वी पर शरीर प्रथम व श्रेष्ठतम मित्र है। हमारे जीवन की मात्रा का वह आधार है। उसके बिना हमारा अस्तित्व मनुष्य रुप में संभव नहीं है।मानव शरीर एक संघनित ऊर्जा का एक पिंड हें और ऊर्जा czagkzkaMh; PksRkuk esa teh gqbZ gSaA
हम अपने शरीर के साथ अन्याय करते है। हम अपने शरीर की बिल्कुल नहीं सुनते है। हम शरीर में रहते है और उसे अपना दुश्मन मानते है। अपने को कुचलने में हम सब उस्ताद है। शरीर ने आपका क्या बिगाड़ा है?
शरीर पदार्थगत है, लेकिन उसमें चेतना रहती है। हमें शरीर का सम्मान करना चाहिए। शरीर एक गूंगा जानवर है। वह अपनी बात अपनी तरह से हम से करता है। हम उसके संकेतो की अनदेखी करते है।
प्राचीन धर्म शास्त्रों तक में शरीर को धर्म का साधन माना गया है। पश्चात्वर्ती  धर्मशास्त्रों में शरीर को पर मान कर उसकी अवहेलना की है जो कि एकदम गलत है।
धर्म ने हमें शरीर के विरुद्ध खड़ा कर दिया है। हम तो आत्मा है, अरे आत्मा होगें लेकिन फिलहाल रहते तो शरीर में ही है। जैन दर्शन तो विशेष कर संयम के नाम पर शरीर को नियन्त्रण की  बात करता है।
शरीर पर ध्यान नहीं देने के कारण 100-150 वर्ष तक जीने वाला शरीर 40 तक आते-आते दम तोड़ देता है। हम थक जाते है।  40 वर्ष में लोगों को कोई न कोई बीमारी घेर लेती है। वह चाहे रक्तचाप, मधुमेह, गैस्ट्रिक, अपच अनिद्रा हो। हमें बीमार होने पर ही  शरीर का महत्व समझ में आता है। तब हम उसकी कद्र करते है।
यह सब हमारे अज्ञान का परिणाम नहीं है। शरीर के प्रति उपेक्षा भाव का परिणाम है।
दुनिया से नाराज रहो, चलेगा लेकिन अपने शरीर से नाराजगी नहीं चलेगी। आप अपने शरीर पर अत्याचार करना बन्द करो। इसने आपका कुछ बिगाड़ा नहीं है बल्कि जीवन दिया है।
शरीर की इज्जत करो, इसकी सुनो यह पृथ्वी स्वर्ग बन जायेगी। आकाश का स्वर्ग तो मेैने नहीं देखा लेकिन शरीर को मित्र बना लो स्वर्ग नीचे उतर आता है। पहले इसी स्वर्ग के मजे लो। स्वर्गीय बनने की जरुरत नहीं है।
शरीर का दिवाना नहीं होना है। शरीर के गुलाम नहीं बनना है। लेकिन शरीर की जायज बात सुनना जरुरी है   ।
हम मात्र शरीर नहीं ,शरीर के पार भी बहुत कुछ  हें ,फिर भी  शरीर हमारा प्रथम व श्रेष्ठतम मित्र है ।

7 विचार “हम शरीर के पार है ,फिर भी शरीर हमारा प्रथम व श्रेष्ठतम मित्र है&rdquo पर;

  1. दुनिया से नाराज रहो, चलेगा लेकिन अपने शरीर से नाराजगी नहीं चलेगी। आप अपने शरीर पर अत्याचार करना बन्द करो। इसने आपका कुछ बिगाड़ा नहीं है बल्कि जीवन दिया है।

    sahi kaha..sehmat hun…

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