निर्णय क्षमता पर सफलता निर्भर है

हमारा समग्र जीवन निर्णयों पर आधारित है। आज हम जो कुछ भी हैं वह अपने निर्णय करने की योग्यता के परिणामस्वरुप ही हैं। हमारी उन्नति और अवनति हमारे द्वारा लिए गए निर्णयों पर ही निर्भर हैं।
व्यक्तिगत, पारिवारिक, सामाजिक, राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय जीवन में आज जो असंतुलन दिखाई दे देता हैं, वह सब हमारे अनिर्णय, अधूरे निर्णय एवं गलत निर्णय के कारण है। यदि हमें उन्नति करनी हैं, शांतिपूर्ण तरीके से जीना है तो निर्णय करने की कला सीखनी पड़ेगी। तभी हम अपने जीवन में क्रांति ला सकते हैं।
सामान्यतःनिर्णय का आधार परिस्थितियां एवं समय होते हैं, लेकिन मूलतः व्यक्ति को फैसले करने के पूर्व अपने दिमाग व दिल से वार्तालाप करनी चाहिए। अपनी बुद्धि एवं अंतः कारण के आधार पर उचित निर्णय किए जा सकते हैं।
निर्णय करने में विचारों का बहुत महत्व है।
वस्तुस्थिति के यथार्थ ज्ञान के अभाव में समीचीन निर्णय नहीं किये जा सकते हैं।
अधिकांश गलत निर्णय भ्रमवश किए जाते हैं। निर्णय करने से हमें बुद्धिपूर्वक सभी पक्षों को समझना पड़ता है। इसके लिए निम्र उपाय किए जा सकते हैं।
सर्वप्रथम निर्णय के विषय एवं उसकी विषय वस्तु को समझना अनिवार्य है। इस हेतु निर्णय के विषय को लिपिबद्ध करना उचित रहता है। लिपिबद्ध के उपक्रम में विषय स्पष्ट हो जाता है। इससे हमारा ध्यान केन्द्रित होता हैं।
निर्णय के विषय को लिखने के बाद उसके सभी विकल्पों पर क्रमशः चिंतन करना चाहिए। प्रत्येक विकल्प और उसके संभावित परिणामों पर मंथन करना अपेक्षित है। प्रत्येक विकल्प की परीक्षा करनी चाहिए, जिससे निर्णय करने में मदद मिलती है। निर्णय पर पहुंचने से पूर्व हमें अपनी आवश्यकता एवं इच्छा को पहचानना चाहिए कि आवश्यकता भौतिक जरुरतों की है या मनोवैज्ञानिक आपूर्ति से संबंधित है। इस प्रकार के मनन से हमारी समझ बढ़ती है और निर्णय लेने में सहायता मिलती है।
समस्त प्रकार के तथ्यों पर विचारने से बुद्धि का कार्य पूरा होता है, लेकिन निर्णय करने में आधा योगदान अंतरात्मा का होता है। अतः निर्णय के पूर्व अंतज्र्ञान की सहायता लेनी चाहिए।
हमारा मन निर्णय के बारे में क्या अनुभव करता है। इसका विचार जरुरी है। इसके लिए हमें स्वयं के प्रति ईमानदार, सजग एवं तटस्थ होना पड़ता है और पूर्वाग्रह तथा आवेश से ऊपर उठ कर वस्तुस्थिति का अवलोकन करना पड़ता है। भय या अहं निर्णय को प्रभावित नहीं का सकें इसका समग्र मूल्यांकन जरुरी है। क्या पता वह क्या कहने जा रहा था।
साथ ही यह भी महत्वपूर्ण है कि निर्णय करने से हम तनावमुक्त होते हैं या तनावग्रस्त। निर्णय लेकर हम प्रसन्न होते हैं या थकते हैं।
उपरोक्त समग्र विश्लेषण से प्रकट होता है कि हमें निर्णय हेतु दिमाग एवं दिल से आज्ञा लेनी चाहिए, तभी निर्णय समग्र एवं समीचीन हो पाता है।
उचित निर्णय करने से व्यक्ति का सम्पूर्ण जीवन रुपांतरित हो जाता है, जिससे सारा दृष्टिकोण ही बदल जाता है और जीवन में आनेवाली छोटी-मोटी व्यथाओं से मुक्ति मिल जाती है। इस कारण अनिर्णय एवं अधूरे निर्णय से होने वाली हानि भी नहीं हो पाती।
(प्रकाशितः दैनिक भास्कर 14 जनवरी 1998)
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5 विचार “निर्णय क्षमता पर सफलता निर्भर है&rdquo पर;

  1. बहुत सही सलाह।

    आदमी तो निर्णय करने में बहुत देरी नहीं करनी चाहिये । दुसरा चीज यह है कि अधिक से अधिक प्रयोग करने चाहिये। ये दोनो शुभ हैं और कहा है – शुभस्य शीघ्रम् ।

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