शिक्षा एवं विकास की धारणाओं को चुनौैती देते हावर्ड स्नातक मनीष जैन से मुलाकात

श्री मनीष जैन, संस्थापक शिक्षान्तर आन्दोलन से मिलने पर गत माह बहुत सी बातें स्पष्ट हुई। हमारी शिक्षा एवं विकास सम्बन्धी हमारी अवधारणाएं सही नहीं है। तभी तथाकथित रुप से सफल व्यक्ति भी व्यथित है। बढ़ता असंतोष व अराजक व्यवस्था के मूल में हमारी शिक्षा एवं विकास दोषी है। अतः इन धारणाओं को बदलने  की सख्त जरुरत है। वर्तमान शिक्षा प्रणाली मनुष्य को तोता बनाने में कुशल है। उक्त प्रणाली से मात्र पैसा और पद (शक्ति) कमाने की ही कुशलता आती हैे। इसे ही जीवन का ध्येय मान लिया गया। वर्तमान शिक्षा प्रतियोगिता सिखाती है, अपने साथीै को धक्का देकर आगे बढ़ना सिखाती है। प्रतिद्वन्दिता में मानवीय मूल्यों की हत्या हो जाती है। विकास के नाम पर प्राकृतिक श्रौतो का बेहिसाब दोहन हो रहा है। विकास के नाम पर मात्र सुविधा और साधन जुटाये जाते है। इस उपक्रम में भी मानवता का लोप होता जा रहा है। तभी  सब कुछ पाकर भी मनुष्य सुखी नहीं है।
श्री मनीष जैन ,हार्वड विश्वविद्यालय से शिक्षा में ग्रेज्युट है एवं उन्होंने वाॅल स्टीªट एवं संयुक्त राष्ट्र की विभिन्न एजन्सियों में काम कर चुके है। वहां भी उन्हें असमानता एवं शोषण मिला । इस दौरान् उन्होंने अनुभव किया कि मानव समाज सही राह  पर नहीं है। राज्य सरकारे एवं संस्थायें भी सही दिशा में नहीं चल रही है। अतःबुनियादी बदलाव हेतु  शिक्षा एवं विकास की अवधारणाओं में परिवर्तन की जरुरत है। जिसके लिए उन्होंने उदयपुर में शिक्षान्तर आन्दोलन चला रहे है।जिसकी विस्तृत जानकारी अगले ब्लाॅग में दी जायेगी।

11 विचार “शिक्षा एवं विकास की धारणाओं को चुनौैती देते हावर्ड स्नातक मनीष जैन से मुलाकात&rdquo पर;

  1. बस्तर के जंगलों में नक्सलियों द्वारा निर्दोष पुलिस के जवानों के नरसंहार पर कवि की संवेदना व पीड़ा उभरकर सामने आई है |

    बस्तर की कोयल रोई क्यों ?
    अपने कोयल होने पर, अपनी कूह-कूह पर
    बस्तर की कोयल होने पर

    सनसनाते पेड़
    झुरझुराती टहनियां
    सरसराते पत्ते
    घने, कुंआरे जंगल,
    पेड़, वृक्ष, पत्तियां
    टहनियां सब जड़ हैं,
    सब शांत हैं, बेहद शर्मसार है |

    बारूद की गंध से, नक्सली आतंक से
    पेड़ों की आपस में बातचीत बंद है,
    पत्तियां की फुस-फुसाहट भी शायद,
    तड़तड़ाहट से बंदूकों की
    चिड़ियों की चहचहाट
    कौओं की कांव कांव,
    मुर्गों की बांग,
    शेर की पदचाप,
    बंदरों की उछलकूद
    हिरणों की कुलांचे,
    कोयल की कूह-कूह
    मौन-मौन और सब मौन है
    निर्मम, अनजान, अजनबी आहट,
    और अनचाहे सन्नाटे से !

    आदि बालाओ का प्रेम नृत्य,
    महुए से पकती, मस्त जिंदगी
    लांदा पकाती, आदिवासी औरतें,
    पवित्र मासूम प्रेम का घोटुल,
    जंगल का भोलापन
    मुस्कान, चेहरे की हरितिमा,
    कहां है सब

    केवल बारूद की गंध,
    पेड़ पत्ती टहनियाँ
    सब बारूद के,
    बारूद से, बारूद के लिए
    भारी मशीनों की घड़घड़ाहट,
    भारी, वजनी कदमों की चरमराहट।

    फिर बस्तर की कोयल रोई क्यों ?

    बस एक बेहद खामोश धमाका,
    पेड़ों पर फलो की तरह
    लटके मानव मांस के लोथड़े
    पत्तियों की जगह पुलिस की वर्दियाँ
    टहनियों पर चमकते तमगे और मेडल
    सस्ती जिंदगी, अनजानों पर न्यौछावर
    मानवीय संवेदनाएं, बारूदी घुएं पर
    वर्दी, टोपी, राईफल सब पेड़ों पर फंसी
    ड्राईंग रूम में लगे शौर्य चिन्हों की तरह
    निःसंग, निःशब्द बेहद संजीदा
    दर्द से लिपटी मौत,
    ना दोस्त ना दुश्मन
    बस देश-सेवा की लगन।

    विदा प्यारे बस्तर के खामोश जंगल, अलिवदा
    आज फिर बस्तर की कोयल रोई,
    अपने अजीज मासूमों की शहादत पर,
    बस्तर के जंगल के शर्मसार होने पर
    अपने कोयल होने पर,
    अपनी कूह-कूह पर
    बस्तर की कोयल होने पर
    आज फिर बस्तर की कोयल रोई क्यों ?

    अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त साहित्यकार, कवि संजीव ठाकुर की कलम से

  2. Dear sir
    Now the time has come to launch a second freedom struggle to liberate the masses from politicians and corrupt bureaucracy. Only a mass movement can cleanse the rotten system. The beginning should be done by revamping education system. There is great disparity in education facility in India. There should be same schooling whether he is a son of Indian President or a peon.

  3. IT GIVES ME GREAT PLEASURE TO NOTE THAT IN THE LAST MONTH YOU DISCOURSED WITH A NOBLE SOUL MR. MANISH JAIN WHO IS STRUGGLING FOR CHANGE IN THE PRESENT CONCEPTS OF OUR EDUCATION AND DEVELOPMENT. YOU AT YOUR BLOGS HAVE CONSISTENTLY ENDEAVOURED TO RAISE ISSUES WHICH OPENS A WIDESPREAD FIELD FOR MILLIONS WHO ARE IN SLUMBER AND DOING NOTHING GOOD FOR THEIR OWN LIVES. LET US COME FORWARD TO EXTEND OUR HELPING HANDS TO STRENGTH THE ” SHIKASHANTAR MOVEMENT” PROFOUNDED BY A MIGHTY HUMAN BEING MR. MANISH JAIN.I SHALL BE HAPPY TO MEET MR.MANISH JAIN WHO IS THE NOBLEST CREATION OF GOD.

    K.L.CHANCHAWAT
    AUTHOR ON INDIRECT TAX LAWS & FORMER ASSTT.COMMERCIAL TAXES OFFICER,214C/22 SARDARPRA,UDAIPUR

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