अपने ब्लॉग का संपादन कैसे करे?

स्वयं सम्पादन करें। अलग-अलग समय पर इस तरह कम से कम तीन या चार बार चेंक करें । सात बार लिखने के पूर्व लेखन में जादू नहीं आता है।

क. विषय वस्तु अनुसार

लेखन में क्रमबद्धता बहुत आवश्यक है। लेखन में  धारा प्रवाह होना चाहिए। उसमें एकरुपता होनी चाहिए। सभी वाक्य परस्पर जुड़े हुए होने चाहिए। ओशो की तरह संयोजित लिखो। प्रत्येक वाक्य लड़ी के मोती की तरह एक साथ गुथे हुए होने चाहिए। प्रवाह बनाए रखो। विसंगत बात मत लिखों।धारा प्रवाह परस्पर सम्बन्धित हो विरोधाभासी बातें न हो उदारहण। समरुपताओं का सहारा ले ।प्रकृति विवरण के साथ लिखें।जीवित उदारहण दो। नाम लिखो।
शोध कहती है, इस ग्रन्थ में ऐसा लिखा है। इस तरह स्रोत का विस्तृत वर्णन लिखो।
दार्शनिक पक्ष, वैधानिक पक्ष, धार्मिक पक्ष, व्यावहारिक पक्ष, सैद्धान्तिक पक्ष, ऐताहासिक सम्बल, साहित्यिक उदारहण, पौराणिक  कहानी आदि द्वारा लेख को  समृद्ध करें।
पेरेग्राफ का गठन- एक पेरा दूसरे से जंजीर की तरह जुड़ा होना चाहिए।
सही शब्दों का चयन करें-लेख शब्दों का जमावड़ा होता है। सही शब्द का प्रयोग जरुरी है।
शब्दों के अर्थ
1. अभिधा मुलक व्याख्या- प्रत्यक्ष अर्थ-शाब्दिक अर्थ
अभी घर में विद्युत आ रही है।
2. लक्षणा-सहायता से अर्थ
अभी दिल में विद्युत का झटका लगा- तेजी, ऊर्जा, नई बात चुभी-उस तरह का अर्थ
3. व्यन्जना-
गुरु ने तीन शिष्यों को शाम 6 बजे आने को कहा’’ सबने अपने-अपने अनुसार अर्थ लगाया। एक को
छुने पर स्त्री कई बार विद्युत के झटके देती है। ट्युशन पढ़ने, एक को पुस्तक लेकर आना, एक के साथ बात करनी है’’।

स्वयं सम्पादन करें। अलग-अलग समय पर इस तरह कम से कम तीन या चार बार चेंक करें । सात बार लिखने के पूर्व लेखन में जादू नहीं आता है। क. विषय वस्तु अनुसारलेखन में क्रमबद्धता बहुत आवश्यक है। लेखन में  धारा प्रवाह होना चाहिए। उसमें एकरुपता होनी चाहिए। सभी वाक्य परस्पर जुड़े हुए होने चाहिए। ओशो की तरह संयोजित लिखो। प्रत्येक वाक्य लड़ी के मोती की तरह एक साथ गुथे हुए होने चाहिए। प्रवाह बनाए रखो। विसंगत बात मत लिखों।धारा प्रवाह परस्पर सम्बन्धित हो विरोधाभासी बातें न हो उदारहण। समरुपताओं का सहारा ले ।प्रकृति विवरण के साथ लिखें।जीवित उदारहण दो। नाम लिखो।
शोध कहती है, इस ग्रन्थ में ऐसा लिखा है। इस तरह स्रोत का विस्तृत वर्णन लिखो।दार्शनिक पक्ष, वैधानिक पक्ष, धार्मिक पक्ष, व्यावहारिक पक्ष, सैद्धान्तिक पक्ष, ऐताहासिक सम्बल, साहित्यिक उदारहण, पौराणिक  कहानी आदि द्वारा लेख को  समृद्ध करें।पेरेग्राफ का गठन- एक पेरा दूसरे से जंजीर की तरह जुड़ा होना चाहिए।सही शब्दों का चयन करें-लेख शब्दों का जमावड़ा होता है। सही शब्द का प्रयोग जरुरी है। शब्दों के अर्थ1. अभिधा मुलक व्याख्या- प्रत्यक्ष अर्थ-शाब्दिक अर्थ अभी घर में विद्युत आ रही है।2. लक्षणा-सहायता से अर्थअभी दिल में विद्युत का झटका लगा- तेजी, ऊर्जा, नई बात चुभी-उस तरह का अर्थ3. व्यन्जना-गुरु ने तीन शिष्यों को शाम 6 बजे आने को कहा’’ सबने अपने-अपने अनुसार अर्थ लगाया। एक को छुने पर स्त्री कई बार विद्युत के झटकेदेती है। ट्युशन पढ़ने, एक को पुस्तक लेकर आना, एक के साथ बात करनी है’’।

ख. भाषा/ व्याकरण अनुसार

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To be Continued)

5 विचार “अपने ब्लॉग का संपादन कैसे करे?&rdquo पर;

  1. एक फूल है कुछ भंवरें है, कुछ है माली !
    सभी चारो तरफ घूम रहें है खाली खाली !
    एक ही फूल मे है अनेक रंग,
    वो फूल करता है सभी का मन भंग!
    अनेक रंग वाला फूल सभी के मन भाया,
    जिस किसी देखा उसीने दिल मे अपनाया!
    भंवरा बोला माली को तू फूल के चक्कर मत लगा,
    तू उससे नाता तोड़के मेरे से उसका मन लगा!
    माली बोला भंवरें को तू तो है सुगंध का भागी,
    आखिर मै तो हूँ उसका अनुरागी!
    संपत बोला दोनों को
    न ये फूल भंवर ले पायेगा
    और न ही यर फूल माली ले पायेगा
    आखिर मई ये फूल तुम दोनों को ही
    खाली हाथ कर जायेगा!
    सच कहत है संपत राही ,
    आखिर मई फूल ले जाते है राही !
    कितनो को रुलाया इसने,
    कितनो को इसने बर्बाद किया!
    आखिर भगवान और किस्मत ने,
    राही को फूल हाथ मे दिया!
    ———–SAMPAT PANWAR (MOKALPUR)

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