विज्ञान की नज़र से क्या पुनर्जन्म होता है?

पुनर्जन्म आज एक धार्मिक सिद्धान्त मात्र नहीं है। इस पर विश्व के अनेक विश्वविद्यालयों एवं परामनोवैज्ञानिक शोध संस्थानों में ठोस कार्य हुआ है। वर्तमान में यह अंधविश्वास नहीं बल्कि वैज्ञानिक तथ्य के रुप में स्वीकारा जा चुका है।
पुनरागमन को प्रमाणित करने वाले अनेक प्रमाण आज विद्यमान हैं। इनमें से सबसे बड़ा प्रमाण ऊर्जा संरक्षण का सिद्धांत है। विज्ञान के सर्वमान्य संरक्षण सिद्धांत के अनुसार ऊर्जा का किसी भी अवस्था में विनाश नहीं होता है, मात्र ऊर्जा का रुप परिवर्तन हो सकता है। अर्थात जिस प्रकार ऊर्जा नष्ट नहीं होती, वैसे ही चेतना का नाश नहीं हो सकता।चेतना को वैज्ञानिक शब्दावली में ऊर्जा की शुद्धतम अवस्था कह सकते हैं। चेतना सत्ता का मात्र एक शरीर से निकल कर नए शरीर में प्रवेश संभव है। पुनर्जन्म का भी यही सिद्धांत है।
पुनर्जन्म का दूसरा प्रत्यक्ष प्रमाण पूर्वजन्म की स्मुति युक्त बालकों का जन्म लेना है। बालकों के पूर्वजन्म की स्मृति की परीक्षा आजकल दार्शनिक और परामनोवैज्ञानिक करते हैं। पूर्वभव के संस्कारों के बिना मोर्जाट चार वर्ष की अवस्थ्सा में संगीत नहीं कम्पोज कर सकता था। लार्ड मेकाले और विचारक मील चलना सीखने से पूर्व लिखना सीख गए थे। वैज्ञानिक जान गाॅस तब तीन वर्ष का था तभी अपने पिताजी की गणितीय त्रुटियों को ठीक करता था। इससे प्रकट है कि पूर्वभव में ऐसे बालकों को अपने क्षेत्र में विशेष महारत हासिल थी। तभी वर्तमान जीवन में संस्कार मौजूद रहे।
प्रथमतः शिशु जन्म लेते ही रोता है। स्तनपान करने पर चुप हो जाता है। कष्ट में रोना ओर अनुकूल स्थिति में प्रसन्नता प्रकट करता है। शिशु बतख स्वतः तैरना सीख जाती है। इस तरह की घटनाएं हमें विवश करती हैं यह सोचने के लिए कि जीव पूर्वजन्म के संस्कार लेकर आता है। वरन नन्हें शिशुओं को कौन सिखाता है?
डाॅ. स्टीवेन्सन ने अपने अनुसंधान के दौरान कुछ ऐसे मामले भी देखे हैं जिसमें व्यक्ति के शरीर पर उसके पूर्वजन्म के चिन्ह मौजूद हैं। यद्यपि आत्मा का रुपान्तरण तो समझ में आता है लेकिन दैहिक चिन्हों का पुनःप्रकटन आज भी एक पहेली है।
डाॅ. हेमेन्द्र नाथ बनर्जी का कथन है कि कभी-कभी वर्तमान की बीमारी का कारण पिछले जन्म में भी हो सकता है। श्रीमती रोजन वर्ग की चिकित्सा इसी तरह हुई। आग को देखते ही थर-थर कांप जाने वाली उक्त महिला का जब कोई भी डाॅक्टर इलाज नहीं कर सका। तब थककर वे मनोचिकित्सक के पास गई। वहां जब उन्हें सम्मोहित कर पूर्वभव की याद कराई  कई, तो रोजन वर्ग ने बताया कि वे पिछले जन्म में जल कर मर गई थीं। अतः उन्हें उसका अनुभव करा कर समझा दिया गया, तो वे बिल्कुल स्वस्थ हो गई। इसके अतिरिक्त वैज्ञानिकों ने विल्सन कलाउड चेम्बर परीक्षण में चूहे की आत्मा की तस्वीर तक खींची है। क्या इससे यह प्रमाणित नहीं होता है कि मृत्यु पर चेतना का शरीर से निर्गमन हो जाता है?
सम्पूर्ण विश्व के सभी धर्मो, वर्गों, जातियों एवं समाजों में पुनर्जन्म के सिद्धांतों किसी न किसी रुप में मान्यता प्राप्त है।
अंततः इस कम्प्युटर युग में भी यह स्पष्ट है कि पुनर्जन्म का सिद्धांत विज्ञान सम्मत है। आधुनिक तकनीकी शब्दावली में पुनर्जन्म के सिद्धांत को इस तरह समझ सकते हैं। आत्मा का अदृश्य कम्प्युटर है और शरीर एक रोबोट है। हम कर्मों के माध्यम से कम्प्युटर में जैसा प्रोग्राम फीड करते हैं वैसा ही फल पाते हैं। कम्प्युटर पुराना रोबोट खराब को जाने पर अपने कर्मों के हिसाब से नया रोबोट बना लेता है।
पुनर्जन्म के विपक्ष में भी अनेक तर्क एवं प्रक्ष खड़े हैं। यह पहेली शब्दों द्वारा नहीं सुलझाई जा सकती है। जीवन के प्रति समग्र सजगता एवं अवधान ही इसका उत्तर दे सकते हैं। संस्कारों की नदी में बढ़ने वाला मन इसे नहीं समझ सकता है।

पुनर्जन्म आज एक धार्मिक सिद्धान्त मात्र नहीं है। इस पर विश्व के अनेक विश्वविद्यालयों एवं परामनोवैज्ञानिक शोध संस्थानों में ठोस कार्य हुआ है। वर्तमान में यह अंधविश्वास नहीं बल्कि वैज्ञानिक तथ्य के रुप में स्वीकारा जा चुका है।
पुनरागमन को प्रमाणित करने वाले अनेक प्रमाण आज विद्यमान हैं। इनमें से सबसे बड़ा प्रमाण ऊर्जा संरक्षण का सिद्धांत है। विज्ञान के सर्वमान्य संरक्षण सिद्धांत के अनुसार ऊर्जा का किसी भी अवस्था में विनाश नहीं होता है, मात्र ऊर्जा का रुप परिवर्तन हो सकता है। अर्थात जिस प्रकार ऊर्जा नष्ट नहीं होती, वैसे ही चेतना का नाश नहीं हो सकता।चेतना को वैज्ञानिक शब्दावली में ऊर्जा की शुद्धतम अवस्था कह सकते हैं। चेतना सत्ता का मात्र एक शरीर से निकल कर नए शरीर में प्रवेश संभव है। पुनर्जन्म का भी यही सिद्धांत है।
पुनर्जन्म का दूसरा प्रत्यक्ष प्रमाण पूर्वजन्म की स्मुति युक्त बालकों का जन्म लेना है। बालकों के पूर्वजन्म की स्मृति की परीक्षा आजकल दार्शनिक और परामनोवैज्ञानिक करते हैं। पूर्वभव के संस्कारों के बिना मोर्जाट चार वर्ष की अवस्थ्सा में संगीत नहीं कम्पोज कर सकता था। लार्ड मेकाले और विचारक मील चलना सीखने से पूर्व लिखना सीख गए थे। वैज्ञानिक जान गाॅस तब तीन वर्ष का था तभी अपने पिताजी की गणितीय त्रुटियों को ठीक करता था। इससे प्रकट है कि पूर्वभव में ऐसे बालकों को अपने क्षेत्र में विशेष महारत हासिल थी। तभी वर्तमान जीवन में संस्कार मौजूद रहे।
प्रथमतः शिशु जन्म लेते ही रोता है। स्तनपान करने पर चुप हो जाता है। कष्ट में रोना ओर अनुकूल स्थिति में प्रसन्नता प्रकट करता है। शिशु बतख स्वतः तैरना सीख जाती है। इस तरह की घटनाएं हमें विवश करती हैं यह सोचने के लिए कि जीव पूर्वजन्म के संस्कार लेकर आता है। वरन नन्हें शिशुओं को कौन सिखाता है?
डाॅ. स्टीवेन्सन ने अपने अनुसंधान के दौरान कुछ ऐसे मामले भी देखे हैं जिसमें व्यक्ति के शरीर पर उसके पूर्वजन्म के चिन्ह मौजूद हैं। यद्यपि आत्मा का रुपान्तरण तो समझ में आता है लेकिन दैहिक चिन्हों का पुनःप्रकटन आज भी एक पहेली है।
डाॅ. हेमेन्द्र नाथ बनर्जी का कथन है कि कभी-कभी वर्तमान की बीमारी का कारण पिछले जन्म में भी हो सकता है। श्रीमती रोजन वर्ग की चिकित्सा इसी तरह हुई। आग को देखते ही थर-थर कांप जाने वाली उक्त महिला का जब कोई भी डाॅक्टर इलाज नहीं कर सका। तब थककर वे मनोचिकित्सक के पास गई। वहां जब उन्हें सम्मोहित कर पूर्वभव की याद कराई  कई, तो रोजन वर्ग ने बताया कि वे पिछले जन्म में जल कर मर गई थीं। अतः उन्हें उसका अनुभव करा कर समझा दिया गया, तो वे बिल्कुल स्वस्थ हो गई। इसके अतिरिक्त वैज्ञानिकों ने विल्सन कलाउड चेम्बर परीक्षण में चूहे की आत्मा की तस्वीर तक खींची है। क्या इससे यह प्रमाणित नहीं होता है कि मृत्यु पर चेतना का शरीर से निर्गमन हो जाता है?
सम्पूर्ण विश्व के सभी धर्मो, वर्गों, जातियों एवं समाजों में पुनर्जन्म के सिद्धांतों किसी न किसी रुप में मान्यता प्राप्त है।
अंततः इस कम्प्युटर युग में भी यह स्पष्ट है कि पुनर्जन्म का सिद्धांत विज्ञान सम्मत है। आधुनिक तकनीकी शब्दावली में पुनर्जन्म के सिद्धांत को इस तरह समझ सकते हैं। आत्मा का अदृश्य कम्प्युटर है और शरीर एक रोबोट है। हम कर्मों के माध्यम से कम्प्युटर में जैसा प्रोग्राम फीड करते हैं वैसा ही फल पाते हैं। कम्प्युटर पुराना रोबोट खराब को जाने पर अपने कर्मों के हिसाब से नया रोबोट बना लेता है।
पुनर्जन्म के विपक्ष में भी अनेक तर्क एवं प्रक्ष खड़े हैं। यह पहेली शब्दों द्वारा नहीं सुलझाई जा सकती है। जीवन के प्रति समग्र सजगता एवं अवधान ही इसका उत्तर दे सकते हैं। संस्कारों की नदी में बढ़ने वाला मन इसे नहीं समझ सकता है।

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पुनर्जन्म रहस्य—- वेदांत एवं विज्ञान की दृ्ष्टि से

98 विचार “विज्ञान की नज़र से क्या पुनर्जन्म होता है?&rdquo पर;

  1. AISI HI JANKARI AUR BIWECHNAON KE LIYE BLOG KA PRYOG SAB KO KARNA CHAHIYE.BHUT ACHCHHA LAGTA HAI TARKSANGAT BIWECHNAON KO PADH KAR.WEB DUNIYA KA SAHI UPYOG IS DESH AUR DUNIYA KO SAHI RAH DIKHANE MAIN SAHAYATA PRDAN KAR SAKTA HAI ISI UDDESHY SE HAMLOGON NE APNE ANDOLAN JISKA MAKSAD HUMANITY AUR GOODNESS KO BADHA KAR IS DESH MAIN SAHI MAYNE MAIN LOKTANTR KI ASTHAPNA KARNA HAI KO WEB PE DALA HAI AAP BHI IS ANDOLAN SE JURIYE KYOKI AAP JAISE SOCH KI IS ANDOLAN KO JAROORAT HAI .LOG IN KAREN-http://www.hprdindia.org

  2. आप इस प्रकार की चर्चा भी करेंगे .. तो अंधविश्‍वासी करार दिए जाएंगे .. जिन वैज्ञानिकों ने भी ऐसी चर्चा की .. उसे मानसिक तौर पर विक्षिप्‍त माना जाता रहा .. पाश्‍चात्‍य के वैज्ञानिकों को जितना विज्ञान को ज्ञान है .. पूरी दुनिया के लोग उतना ही मानेंगे .. बाकी क्षेत्र में रिसर्च करनेवालों की भी ये दुनिया नहीं सुननेवाली .. सबके दिन फिरते हैं .. पर मौलिक चिंतन करनेवालों के दिन कभी नहीं फिरेंगे .. वे भाग्‍य में शायद यही लेकर आए हैं !!

  3. विवादास्पद विषय -हिंदू धर्म दर्शन तो पूरा पुनर्जन्म पर ही टिका है -मगर ज्यादातर वैज्ञानिक अभी भी इसे स्वीकार नहीं करते -इसकी मेथडोलोजी वर्क आउट नहीं है !

  4. पुनर्जन्म ऐसा विषय है जिस पर विश्व की सिर्फ़ १० प्रतिशत जनता ही विश्वास करती है। सन्सार भर में आज जितने भी आविष्कार अस्तित्व में हैं सभी क्रिश्चन धर्मावलबियों की ही देन है। हिन्दु और इस्लाम धर्म के अनुयाईयों के द्वारा कोई लोकोपयोगी आविष्कार नहीं किया जाना आश्चर्य करने का विषय है। ये लोग भूत ,प्रेत, जिन्न में विश्वास रखते हैं और धार्मिक पाखण्डपूर्ण कार्य कलापों मे अपना जीवन और समय नष्ट कर्ने को महत्वपूर्ण मानते हैं। अगर पुनर्जन्म होता है तो पूर्व जन्म में किये गये कृत्यों की स्मृति भी होना जरूरी है । मनुष्य को यह पता होना चाहिये कि पूर्व जन्म में किये गये किस पाप की सजा उसे अब मिल रही है। पाप में प्रवृत्त व्यक्ति जब सुख और वैभव से परिपूर्ण जीवन जीता है तो पुनर्जन्म सिद्धान्त वाले कहते हैं कि इसने पूर्वजन्म में पुण्य किये हैं जिसक फ़ल इस जनम में मिल रहा है। ऐसी ही कपोल कल्पना से वेष्ठित इस सिद्धान्त में कोई सचाई नहीं है। जबरन ऐसी असत्य बातों में सत्य की खोज करना अन्धविश्वास को बढावा देना है।

      1. KYA APKO APANE BACHPAN JAB AAP SALBHAR SE BHI KAM UMAR KE THE KI BATEN YAD HA. JAB IS JANAM KI BATEN HI AAP KO YAD NAHIN HAN TO PICHELE JANAM KI BATEN JAB KI MARNE KE BAD AAP KA SHARIR NAST KAR DIYA JATA HA KESE YAD RAHEGI. YE KEWAL VISHWAS KI BAT HA.

    1. जबरन ऐसी असत्य बातों में सत्य की खोज करना अन्धविश्वास को बढावा देना है, mujhe aapke javab par hansi aarahi he kynoki aapne angreji hi nahi angrejno ki soch ko bhe apnaliya he, tabhi to aap सत्य को अन्धविश्वास की sanghya de rahe hne,,,,,,,,,,, aaj hindu dharam ko baaharwalo se jyada hinduno se hi khatra peda ho gaya he..
      ,,,,,,,,,,,
      ,,,,,,,,,,,,,,,,,
      yanha is baat ko kehne se bilkul nahi ghabranuga ki hindu dharam walno ko dusre dharam walno ki thali me ghee jyada deekhny laga he jo galat hi nahi sarvatha anuchit bhe he,,,,,,kynoki yahni se patan kaa marag khulna shuru ho jata he,,,,,,,,,,,,,,,,

  5. हिन्दु और इस्लाम धर्म के अनुयाईयों के द्वारा कोई लोकोपयोगी आविष्कार नहीं किया जाना आश्चर्य करने का विषय है। ये लोग भूत ,प्रेत, जिन्न में विश्वास रखते हैं और धार्मिक पाखण्डपूर्ण कार्य कलापों मे अपना जीवन और समय नष्ट कर्ने को महत्वपूर्ण मानते हैं।……….

    @ Dr. aalok-

    Nobody bothers to think about janam, maran and punarjanam. I am enjoying all the inventions by your so called inventors ( Christians )

  6. जयंत जी सबसे पहले तो में आपके लिए धन्यवाद देना चाहूँगा जो अपने एक अच्छे विषय पर लिखा इस माद्यम से नयी बातें और सोच सामने आती है.
    जहां तक पुनर्जन्म का सवाल है तो मेरी राय है की किसी भी बात पर विश्वास कर लेना आगे आने वाली उपलब्धि के लिए अवरोध लगा देना है . विश्वास चाहे सकारात्मक हो या नकारात्मक , चाहे वह पाश्चात्य हो या पूर्व का हो , दोनों ही तरफ से निराशा ही हाथ लगती है .
    कारन ये है की हम आज भोतिक स्वरुप में है ,और अभोतिक की कल्पना कर रहे है .क्योंकि हमारी खोज अब तक पूरी नहीं हुई है इसलिए ये बात कहना की बात एकदम सत्य है या पूर्ण विश्वास से ये कहना की बात असत्य है शायद कठोरता होगी .
    सवाल ये नहीं की कोई वैज्ञानिक बात का सत्यापन कर रहा है या नहीं, सवाल ये उठाता है की क्या हमारी खुद की नजर इतनी समर्थ है की हम सत्य को पहचान सके .
    शायद नहीं, क्योंकि कई महापुरषों ने ये भी कहा है की यदि जो वे कहते है उसी को मान लिया गया तो भी सत्य का मार्ग दुष्कर हो जायेगा,और वे यह भी कहते है अभोतिक की पहचान बताने की वे जो भी कोशिश करते है वो झूठ हो जाती है चाहे वे खुद उस बात तक पहुच चुके हो.

  7. मै इस बात से बिल्कुल सहमत हूँ कि पुनर्जन्म होता है क्योकि हमारे एक परिचत है उन का एक लडका जब वह छोटा सा था तो उसे अपना पिछला जन्म याद था मात्र 9-10 साल का था सोचा ऎसे गप्प मार रहा है लेकिन जैसे जैसे नाम शहर परिवार के बारे मे बताया और जब वहाँ जाकर पता किया तो बिल्कुल सत्य बात थी ।

  8. Dear Sir / Madam,
    Greetings from Bharatiya Opinion Hindi Magazine, Karnataka.
    It is a pleasure for us to say that your blog has been featured as a reference
    in a write-up in the latest issue of our Magazine,
    You can read the Magazine online here —>>http://bharatiyaopinion.com
    Your Blog is featured on the page 48.

    We would like to send you a copy of the magazine if you could send
    us the your postal details. Our email – editorbo@gmail.com

    With Regards,
    Kamal Parashar
    Relations Manager.
    9945488001.

  9. Aapka lekh padne ke bad bhi main rebirth nahi manta kyoki agar rebirth hota to sirf insan ki hi tadad kyo badti? yane world ki papulation pahle aur aaj me arbo ka diffrance hai to itni manav ki aatmaye kahan se aai aur manav ki hi kyo? kya aur praniyo ki tadad arbo tak badi hai? nahi. kai prani to vilupt ho chuke hai ya ho rahe hai isliye main rebirth nahi manta aur ye meri apni soch hai jise maine bahut adhyan karne ke bad paya hai. to jindgi milegi na dubara dosto. Have fun.

  10. हिदू धर्म शास्त्रों के अनेक अपुष्ट सिद्धांतों में से एक पुनर्जन्म का सिद्धांत है। इसे मान लेने से कोई लाभ नहीं और इसे नकारने से कोई हानि नहीं क्योंकि विश्व की ९०% आबादी इसे मानना तो दूर इसके बारे मे चर्चा भी नहीं करना चाहते। पुनर्जन्म के सिद्धांत में कई खामियां हैं। सत्य कथाओं में में पुनर्जन्म की घटनाओं का उल्लेख पढने को मिलता है। उनमे अधिकांशत यह बताया गया होता है कि अमुक व्यक्ति ने मरने के बाद फ़लां जगह जन्म लिया। माधवराव सिंधिया के पुनर्जन्म की कथा भी पढने में आयी थी। अगर यह सत्य है तो फ़िर ८४ लाख योनियों के सिद्धांत का क्या हुआ? जो किस्से सत्य कथाओं मे लिखे गये हैं उनमें पुरुष को पुरुष और नारी को नारी के ही रूप में जन्म लेने की बात आई है। दर असल सत्य कथाएं लिखने वाली लेखक मंडली का ही यह करिश्मा जान पडता है। मैने अपनी पूर्व टिप्पणी में यह प्रश्न उठाया था कि अगर किसी व्यक्ति को अपने पूर्व जन्म के पापों की सजा मिल रही है,दुख भोग रहा है तो उसे यह स्मरण तो होना ही चाहिये कि उसने कौन से गलत कार्य पूर्व जन्म में किये थे जिसका दंड अब उसे मिल रहा है। न्यायालय किसी को सजा सुनाता है तो उसे बताया जाता है कि उसको कौन से अपराध की सजा दी गई है।क्या पुनर्जन्म वाला ईश्वर किसी व्यक्ति को कारण बताये बगैर सजा देता रहता है? ईश्वर के ऐसे स्वरूप को कौन मान्यता देगा? इसी सिद्धांत की वजह से न्यायालय भी किसी मामले पर वर्षों तक अपना निर्णय नहीं सुनाते क्योंकि उन्हें मालूम है कि असली सजा तो अपराधी को ईश्वर का न्यायालय ही देगा। मेरे विचार लिखे हैं अन्यथा नहीं लेंगे।

    1. R u wrong sir,AGAR HAMARA PURVJANM HOTA HAI TO HAME YAAD HONA CHAHIYE, YE AAPKA KAHNA HAI,SIR,AAP KE ANUSAR SMRTI SHAKTI PER HI MANAV KA ASISTAV NIRBHAR HAI, SIR KISI KO BHI APNE JANM SE 6 MAHINE TAK KI BATEY YAD NAHI HOTI, AAP KE ANUSAR TO YE SARI DUNIYA HI UAD JAYEGHI,FIR PREVIOUS JANM TO KASE YAAD RAHEGA,AAP KAHTE HAI KI YE SAB DHARMIK ANDVISVASH HAI,TO SIR AAP BHI MANLO KI AAPKO SCIENCE KA ADVISVASH HAI,KEWAL PRTYASH KO MANEGE ANYDHA NAHI,BHUT KUCH HAI AAPKO BATANE KE LIYE MAGAR ITNA HI KAFI HAI YAHA

    1. Respected Siraj Sheikh
      In science the energy is conserved the only thing is that energy can be converted from one form into another. Like this, number of souls may be conserved as per the god. whether it is in the body of a dog or in the body of man/woman. ie I mean the number of souls are same as were before 5,0000 years. ie if you count all creatures on the earth incuding human and animals. At present the number of animals are decreasing hence no of human bodies increasing but number of souls are constant.
      thanks

  11. जि हा आप बिल्कुल सच कह रहे हो पूर्ण जनम होता है । ओर वेद के अनुसार ८४ लाख योउनी लेने कि जरुरत सब को नही पड्ती है । मेने भि इसी बिस्य मै एक किताब लिख रहा हुँ जिस्का नाम है “जीवन मृत्‍यु ओर आत्मा चक्र का रहस्या ………………..

    1. मरने के बाद आत्मा पुनर्जन्म लेती है , प्रेत आत्मा बनकर लोगों को कष्ट देती है ,डराती है ये सभी बातें परिवेश से अनुकूलित होती देखी गयी हैं} व्यक्ति जिस परिवार और समाज के बीच रहता है उन लोगों की सोच का मस्तिष्क पर प्रभाव होता रहता है| भुत प्रेत के किस्से अक्सर चर्चा में रहते हैं| इसी प्रकार पुनर्जन्म के किस्से भी सत्य कहानियां जैसी पत्रिकाओं में छपते रहते हैं| समग्र रूप से इनका असर मानव मस्तिष्क पर बहुत गहरा पड़ता है | और जो जैसा सोचता है वैसा हो जाता है| दुनिया के ९० प्रतिशत लोग पुनर्जन्म के सिद्धांत को नहीं मानते हैं| हिंदू धर्म और इससे निकले जैन,बोद्ध धर्म में पुनर्जन्म की मान्यता है| अन्य धर्म इसे स्वीकार नहीं करते|

  12. मै मानता हू कि पुनर्म जन्म होता है पर
    आपको ऐसा लगेगा कि मेरा जन्म अभी हुवा है.
    ना तो आप को मालूम रहेगा नही दुसरेको.लेकिन आपमे जो आत्मा रहेगी ओ पहेली जन्म वाली रहेगी.जो भी वेक्ती कि मरने के बाद आप मे प्रवेश करेगी .
    आपके मन मे जो भि सोचेगे ओ वेक्ती वही सोचेगा..लेकिन किसिको पुर्फ नही कर सकते..जैसे कि आप किसी जंगल मे अपने दोस्त के सात गये और.आपको कोई प्रेत आत्मा दिखी.और आप अपने दोस्त को बतायेगे.लेकिन आप का दोस्त आप पे विश्वास नही करेगा.क्यू कि ओ प्रेत आत्मा सिर्फ येक ही.आदमिको दिखेगी..दूसरो को नहि.

      1. दुनिया के 90 प्रतिसत आबादी पुनर्जन्म की
        सिद्धांत को नही मानता है।

        क्योकि इसके बारे में कोई खास कारण नही है।

  13. Respected Sir,

    Purvjanm ki bat sahi he…..
    muje bhi aesa lagta he ki me purvjanm me kya tha ?
    meri 7 sister thi Aavad, jogad, togad, bij, halya, sachai & khodiyar
    me uska bhai tha Merakhya
    aesa muje fill ho raha he….

    sir plz reply ke muje apni purvjanm vali sister ko milna he to jo aaj hindu dharam me jiski puja hoti he kese milu …..
    thanks…

  14. When we born Our SUPER CONCIOURS MIND IS LIVE . Our Mind Map made from our belief. Our Brain programming start when we born. First of all our belief made by our
    1 )PARENTS, NEIGHBOURS, RELATIVES
    2) eDUCATIONal system Teacher
    3.) Religion
    4) Societies Rules and regulation

    If we free (Means not affected all aboves) then our suprconcious and creative mind would live till die. We do not need any question’s answer . We are with natures. We speak natures langauges. not words.

    So do not beleive anything . become neutral . Let Science do work. They will find one day that is sure.

    EVERY HUMAN HAS DIFFRENT THOUGHT WHICH ARE RELATED TO ABOVE FOUR BELIEF SYSTEM.

    MAP ARE NOT TERRITORY.
    (tHAT IS WHY BHAGVAD GEETA BOOK IS WRRITTEN BY 1000 OF AUTHER WITH DIFFRENT MEANING.

    sANJAY dAVdA 9726939930

  15. Mere papa ko death ho gai ab mere papa kaha hain kya mere papa mujhe dekhte hain … kya mere papa mujhe mehsus karte hain….
    Mere papa bahut ache the. …
    Bahut dharmik b the. …
    Hamesha Darshan k liye Tirupati balaji vaisno devi jate rhte the. ..
    Phir b unke sath aisa kyu hua. ?
    Meri 2 bahno ki saadi baaki hai aur 2 bhaiyo ki saadi baaki hai ….
    Meri mummy bahut pooja kurti thi phir b ye sab ho gya…
    Mere papa sudden bimar pade aur unki death ho gai…
    ab kaha hain mere papa?
    Humlog bahut disturb ho gye hain…
    Hum log kya kare?
    Ab kya hoga. ?
    Pls suggest me…

  16. Mere papa ko death ho gai ab mere papa kaha hain kya mere papa mujhe dekhte hain … kya mere papa mujhe mehsus karte hain….
    Mere papa bahut ache the. …
    Bahut dharmik b the. …
    Hamesha Darshan k liye Tirupati balaji vaisno devi jate rhte the. ..
    Phir b unke sath aisa kyu hua. ?
    Meri 2 bahno ki saadi baaki hai aur 2 bhaiyo ki saadi baaki hai ….
    Meri mummy bahut pooja kurti thi phir b ye sab ho gya…
    Mere papa sudden bimar pade aur unki death ho gai…
    ab kaha hain mere papa?
    Humlog bahut disturb ho gye hain…
    Hum log kya kare?
    Ab kya hoga. ?
    Pls suggest me…main 2 din se que kar rhi hu BT koi reply bhi nhi aa rha…
    Mere papa ki age 58 year tha….

  17. जब व्यक्ति मरता है तो चीजें पूरी तरह से खत्म नहीं होती। व्यक्ति के विचार, अनुभव, उसकी आकंक्षाये ऊर्जा में तब्दील होकर शरीर से बाहर निकल जाती हैं अौर शरीर पंचतत्वों में विलीन हो जाती हैं फिर वो ऊर्जा कहीं न कहीं अपना प्रभाव बनाती हैं। ये सत्य हैं।

    Jayanti sir is a high thinker on entire web.
    I thanked him

  18. Sir agr mai khu ki ye puri duniya god ka bnaya gya ek system he uske bad es system me jo kuch bhi ho rha he usme god ka kisi bhi trike se koi sambandh nhi he to kya ye true he?

    Because
    Mujhe lgta he ki es system me jo kuch bhi ho rha he wo humen dwara ki gyi activities ke according hoti he aur en activities ko god control nhi krta he

  19. Ha mai manta hu ki Punarjarm hota hai mujhe yakin hahi tha jab me up me gaya tha meri sasural me ek dacche ne janm liya tha aaj vo 12 saal ka hai jab usne yah bat batai to yakin nahi tha fhir usne patta bataya to yakin hua ki yah sach hai kyu ki vo kahta hai ki use goli mara tha aaj usne dusmna ka name bhi bataya to waha ke gaon walo ne bhi bataya tab jake mujhe yakIin hua
    jo sach hai vo sach hai

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