स्पेंसर जोंसन की निर्णय करने की विधि

सर्वप्रथम निर्णय के विषय एवं उसकी विषय वस्तु को समझना अनिवार्य है। इस हेतु निर्णय के विषय को लिपिबद्ध करना उचित रहता है। लिपिबद्ध के उपक्रम में विषय स्पष्ट हो जाता है। इससे हमारा ध्यान केन्द्रित होता हैं।
निर्णय के विषय को लिखने के बाद उसके सभी विकल्पों पर क्रमशः चिंतन करना चाहिए। प्रत्येक विकल्प और उसके संभावित परिणामों पर मंथन करना अपेक्षित है। प्रत्येक विकल्प की परीक्षा करनी चाहिए, जिससे निर्णय करने में मदद मिलती है। निर्णय पर पहुंचने से पूर्व हमें अपनी आवश्यकता एवं इच्छा को पहचानना चाहिए कि आवश्यकता भौतिक जरुरतों की है या मनोवैज्ञानिक आपूर्ति से संबंधित है। इस प्रकार के मनन से हमारी समझ बढ़ती है और निर्णय लेने में सहायता मिलती है।
समस्त प्रकार के तथ्यों पर विचारने से बुद्धि का कार्य पूरा होता है, लेकिन निर्णय करने में आधा योगदान अंतरात्मा का होता है। अतः निर्णय के पूर्व अंतज्र्ञान की सहायता लेनी चाहिए।
हमारा मन निर्णय के बारे में क्या अनुभव करता है। इसका विचार जरुरी है। इसके लिए हमें स्वयं के प्रति ईमानदार, सजग एवं तटस्थ होना पड़ता है और पूर्वाग्रह तथा आवेश से ऊपर उठ कर वस्तुस्थिति का अवलोकन करना पड़ता है। भय या अहं निर्णय को प्रभावित नहीं का सकें इसका समग्र मूल्यांकन जरुरी है। क्या पता वह क्या कहने जा रहा था।
साथ ही यह भी महत्वपूर्ण है कि निर्णय करने से हम तनावमुक्त होते हैं या तनावग्रस्त। निर्णय लेकर हम प्रसन्न होते हैं या थकते हैं।
उपरोक्त समग्र विश्लेषण से प्रकट होता है कि हमें निर्णय हेतु दिमाग एवं दिल से आज्ञा लेनी चाहिए, तभी निर्णय समग्र एवं समीचीन हो पाता है।
उचित निर्णय करने से व्यक्ति का सम्पूर्ण जीवन रुपांतरित हो जाता है, जिससे सारा दृष्टिकोण ही बदल जाता है और जीवन में आनेवाली छोटी-मोटी व्यथाओं से मुक्ति मिल जाती है। इस कारण अनिर्णय एवं अधूरे निर्णय से होने वाली हानि भी नहीं हो पाती।
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10 विचार “स्पेंसर जोंसन की निर्णय करने की विधि&rdquo पर;

  1. Mere papa bahut ache the…
    Bahut dharmik b the…
    Hamesha Darshan k liye Tirupati banai.,
    Vaisno devi aur b dharmik shaman jate rate the….
    Bhagwaan me bahut biswaas rakha karne the. …
    Apni hard working se papa 0 se 100 tak pauche…..
    Meri mummy b bahut pooja kurti thi…
    Phir b Meri mummy ko aisa din dekhna pada kyu?
    Meri 2 bahno ki saadi baaki hai aur 2 bhaiyo ki…
    Mere papa ki age 58 yes thi …
    Sudden bimar pade aur ye sab ho gya?
    Kya mere papa humlogo ko yaad karne hain?
    Kya mere papa humlogo ko mehsus karne hain. ..
    Hum log bahut disturb ho gye….
    Pls help me…
    Suggest me….

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